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Gurugram Real Estate Fraud: गुरुग्राम में फ्लैट के नाम पर 242 लोगों से करोड़ों की ठगी, इंडोनेशिया भागते समय दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ा गया बिल्डर

Jun 10, 2026 5:37 PM

गुरुग्राम। सपनों के घर की चाहत रखने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों को ठगने वाले सफेदपोश अपराधियों के खिलाफ गुरुग्राम पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। दिल्ली के मोहन गार्डन का रहने वाला 33 वर्षीय अनुभव, जो पिछले कई महीनों से कानून की आंखों में धूल झोंक रहा था, उसे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ साल 2025 में ही लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया जा चुका था, जिसके चलते जैसे ही उसने इंडोनेशिया जाने के लिए इमिग्रेशन क्लियरेंस की कोशिश की, सुरक्षा एजेंसियों के अलार्म बज उठे।

पिता के साथ मिलकर रचा ठगी का ताना-बाना

पुलिस की शुरुआती पूछताछ में जो सच सामने आया है, वह रियल एस्टेट के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े के घिनौने चेहरे को उजागर करता है। अनुभव इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड ईशपाल भारद्वाज का बेटा है। इन दोनों ने अपने कुछ अन्य गुर्गों के साथ मिलकर 'सुनहरा अपना घर सोसायटी' के बैनर तले एक ऐसी स्कीम बेची, जिसका असलियत से कोई वास्ता नहीं था। साल 2008 से 2013 के बीच इन लोगों ने सेक्टर-55, गुरुग्राम में फ्लैट आवंटन के नाम पर 242 लोगों से किस्तों में करोड़ों रुपये ऐंठ लिए।

फर्जी एमओयू और गबन की इनसाइड स्टोरी

जांचकर्ताओं के मुताबिक, अनुभव का शातिरपन यहीं नहीं रुका। वह इस कथित हाउसिंग सोसायटी का कोई अधिकृत सदस्य या पदाधिकारी नहीं था, इसके बावजूद उसने सोसायटी को किसी तीसरी कंपनी को बेचने के नाम पर एक फर्जी समझौता पत्र (MOU) तैयार कर लिया। इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए बाकायदा कंपनी के नाम पर जाली बैंक खाते खुलवाए गए। फ्लैट खरीदारों की खून-पसीने की कमाई को सीधे इन्हीं खातों में ट्रांसफर करवाया गया और बाद में इस पूरी रकम को आपस में बांटकर आरोपी ऐश-ओ-आराम की जिंदगी जीने लगे।

2017 में खुली थी धोखाधड़ी की परतें

इस महाघोटाले का खुलासा तब हुआ जब अप्रैल 2017 में एक पीड़ित महिला ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। महिला ने बताया कि सेक्टर-55 की इस परियोजना में फ्लैट के नाम पर उससे करीब साढे 37 लाख रुपये वसूले गए थे, लेकिन 2013 में अचानक वहां कंस्ट्रक्शन का काम बंद कर दिया गया। सालों बीत जाने के बाद जब न तो फ्लैट मिला और न ही पैसे वापस आए, तब पीड़ितों को ठगे जाने का अहसास हुआ। मामला गंभीर होने के कारण सेक्टर-56 थाने से जांच आर्थिक अपराध शाखा-1 को ट्रांसफर की गई थी।

ईओडब्ल्यू की टीम अब तक इस मामले में अनुभव, उसके पिता ईशपाल भारद्वाज, अमित, प्रदीप, संदीप और जगबीर समेत छह लोगों को दबोच चुकी है। अदालत ने अनुभव को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है, जिससे पूछताछ कर यह पता लगाया जा रहा है कि इस ठगी का पैसा किन-किन जगहों पर निवेश किया गया है और क्या इस सिंडिकेट में कुछ अन्य सफेदपोश चेहरे भी शामिल हैं।

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