Haryana News: हरियाणा हाइब्रिड धान और अन्न दर्पण ऐप ने बढ़ाई परेशानी, राइस मिलर्स ने रखी 17% नमी और बोनस भुगतान की शर्त

हरियाणा हाइब्रिड धान और अन्न दर्पण ऐप ने बढ़ाई परेशानी, राइस मिलर्स ने रखी 17% नमी और बोनस भुगतान की शर्त
Haryana News: आगामी धान के सीजन की आहट के साथ ही हरियाणा के राइस मिलरों और राज्य सरकार के बीच तनातनी गहरा गई है। कैथल में आयोजित ‘हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्ज एंड डिलर्ज एसोसिएशन’ की राज्य स्तरीय बैठक में प्रदेश भर के मिल मालिकों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर हुंकार भरी
एसोसिएशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक सरकार अतिरिक्त सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) की डिलीवरी और उनकी पुरानी मांगों का स्थाई समाधान नहीं निकालती, तब तक कोई भी राइस मिलर सीएमआर रजिस्ट्रेशन नहीं कराएगा और न ही धान की सरकारी खरीद में हिस्सा लेगा।
6 लाख मीट्रिक टन चावल गोदामों से बाहर नहीं, एफसीआई में जगह की भारी किल्लत
बैठक में मिल मालिकों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि पिछले सीजन का करीब 6 लाख मीट्रिक टन चावल अभी भी मिलों के गोदामों में डंप पड़ा हुआ है।
भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास जगह (स्पेस) की भीषण कमी के कारण प्रदेश के करीब 843 राइस मिलर्स बेहद गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। इसके अलावा, हाइब्रिड धान की कुटाई के दौरान 40 से 45 प्रतिशत तक ब्रोकन (टूटा हुआ चावल) निकलने का मुद्दा उठाते हुए एसोसिएशन ने सरकार से इस संबंध में एक स्पष्ट और व्यावहारिक नीति बनाने की मांग की है।
‘किसानों का नुकसान नहीं होने देंगे, फड़ देंगे लेकिन जिम्मेदारी एजेंसी की होगी’
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “हम नहीं चाहते कि धान का सीजन शुरू होने पर किसानों को अपनी खून-पसीने की फसल बेचने में कोई परेशानी हो।
इसलिए मिलर्स खरीद एजेंसियों को अपने मिलों के फड़ (प्रांगण) उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं, ताकि किसानों की फसल सुरक्षित रखी जा सके। हालांकि, इन फड़ों पर रखी धान की पूरी जवाबदेही संबंधित खरीद एजेंसी की होगी। जब तक हमारी मांगों का निस्तारण नहीं होता, मिलर्स स्वयं खरीद की प्रक्रिया से दूरी बनाए रखेंगे।”
2 साल से बोनस अटका, मापदंडों पर सख्ती की मांग
मिलर्स ने सरकार के सामने खरीद के कड़े मापदंड तय करने की भी शर्त रखी है। उन्होंने मांग की है कि एजेंसियों द्वारा खरीदी जाने वाली धान में नमी 17 प्रतिशत से कम, ब्रोकन 25 प्रतिशत से कम तथा डैमेज व डिस्कलर 2-2 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
अमरजीत छाबड़ा ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद पिछले दो वर्षों का बोनस अभी तक खातों में नहीं पहुंचा है। उन्होंने धान की लोडिंग-अनलोडिंग, कस्टडी-मेंटेनेंस चार्जेज, बारदाना डेप्रिसिएशन का रुका हुआ भुगतान जल्द जारी करने और पहले काटी गई राशि लौटाने की मांग की।
इसके साथ ही मिलर्स ने अन्न दर्पण ऐप से आ रही तकनीकी दिक्कतों और 50 लाख रुपये की एफडी जमा कराने के नए प्रावधान पर भी गहरा विरोध जताया है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार के साथ सकारात्मक बातचीत के बाद ही अगली रणनीति तय की जाएगी।
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