August 2, 2026

Haryana Rajasthan water agreement: ‘हरियाणा का पानी राजस्थान को दिया तो सूख जाएंगे 6 जिले’, कैथल में इनेलो प्रदेशाध्यक्ष ने सरकार को घेरा

0
Haryana Rajasthan water agreement: 'हरियाणा का पानी राजस्थान को दिया तो सूख जाएंगे 6 जिले', कैथल में इनेलो प्रदेशाध्यक्ष ने सरकार को घेरा

'हरियाणा-राजस्थान जल समझौते से मरुस्थल बनेंगे हमारे जिले

Haryana Rajasthan water agreement: हरियाणा और राजस्थान के बीच हाल ही में हुए यमुना जल समझौते को लेकर सूबे की सियासत गरमा गई है। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के प्रदेशाध्यक्ष रामपाल माजरा ने इस समझौते को हरियाणा के हितों पर कुठाराघात करार दिया है। बुधवार को कैथल स्थित अपने निवास पर पत्रकारों से रूबरू होते हुए माजरा ने साफ कहा कि इनेलो इस जनविरोधी समझौते को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। इसके खिलाफ पार्टी आगामी 5 जुलाई को चैनत गांव में चल रहे किसानों के धरने को अपना समर्थन देगी और इसके तुरंत बाद हल्का स्तर पर एक बड़ा जनजागरण अभियान शुरू किया जाएगा।

‘हथिनीकुंड का पानी गया, तो सूखे की चपेट में आएंगे ये 6 जिले’

रामपाल माजरा ने 29 जून को केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुए समझौते की बारीकियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस नए दस्तावेज में साल 1994 की उन्हीं पुरानी शर्तों को दोहराया गया है जो पहले से ही हरियाणा के खिलाफ थीं। माजरा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर हथिनीकुंड बैराज से हरियाणा के हिस्से का पानी राजस्थान की तरफ मोड़ दिया गया, तो यमुनानगर, पानीपत, करनाल, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल जैसे खेती-किसानी वाले समृद्ध जिले बूंद-बूंद पानी को तरस जाएंगे और पूरा इलाका सूखे की चपेट में आ जाएगा।

हजारों करोड़ की बर्बादी, हासिल कुछ भी नहीं

योजना की वित्तीय और जमीनी हकीकत पर बात करते हुए इनेलो नेता ने कहा कि ताजेवाला से राजस्थान के चुरू तक करीब 295 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाने का खाका खींचा गया है। इस पूरी कवायद पर 33 से 34 हजार करोड़ रुपए का भारी-भरकम खर्च आएगा, जिसमें से करीब 3900 करोड़ रुपए सिर्फ जमीन अधिग्रहण पर फूंक दिए जाएंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इतनी भारी रकम खर्च करने के बाद भी राजस्थान को केवल मानसून के सीजन में सवा सौ क्यूसेक पानी ही नसीब होगा। यह पूरी तरह से टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी और हरियाणा के अधिकारों को गिरवी रखना है।

कांग्रेस और भाजपा दोनों को लिया आड़े हाथ

माजरा ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कांग्रेस को भी इस दुर्दशा के लिए बराबर का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने याद दिलाया कि 12 मार्च 1954 को जो समझौता 50 साल के लिए हुआ था, उसे कांग्रेस ने राजनीतिक दबाव में आकर 10 साल पहले ही खोल दिया। इसके चलते 1994 के यमुना जल समझौते में हरियाणा की हिस्सेदारी 67 फीसदी से घटकर महज 46 फीसदी रह गई थी, जिसका इनेलो विधायकों ने अपने इस्तीफे देकर विरोध किया था। आज वही इतिहास भाजपा दोहरा रही है।

‘अपने गांव प्यासे, राजस्थान को पानी बांट रही सरकार’

सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए माजरा ने कहा कि हरियाणा के अपने गांव पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। चैनत गांव के लोग लंबे समय से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार उनकी सुध लेने की बजाय राजस्थान को पानी परोस रही है। प्रदेश का भूमिगत जलस्तर लगातार रसातल में जा रहा है। हांसी-बुटाना, दादूपुर-नलवी और एसवाईएल (SYL) जैसी नहरें सूखी पड़ी हैं क्योंकि भाजपा ने इन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया है। माजरा ने एलान किया कि इस हकमारी के खिलाफ इनेलो कार्यकर्ता जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

यी भी पढ़ें; कुरुक्षेत्र के होटल में नोएडा के IT इंजीनियर की संदिग्ध मौत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed