अनिल विज का बड़ा हमला: "महिलाओं की शक्ति से डर गया विपक्ष, इसीलिए गिराया आरक्षण बिल"
Apr 18, 2026 3:13 PM
हरियाणा। हरियाणा के गब्बर और कैबिनेट मंत्री अनिल विज अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। शनिवार को अंबाला में मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के गिरने पर विपक्षी दलों को जमकर कोसा। विज ने कहा कि कल का दिन लोकतांत्रिक इतिहास में बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था, जब महज 54 वोटों के अंतर से महिलाओं को हक देने वाला बिल गिर गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी पार्टियों के पुरुष नेता यह सोचकर घबरा गए कि अगर महिलाएं शक्ति में आ गईं तो उनका क्या होगा। विज ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह बिल केवल आरक्षण नहीं, बल्कि महिलाओं को उनका वाजिब हक देने और परिसीमन के जरिए लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम था।
"प्रतिनिधित्व का संकट: 1976 की सीटों पर 2026 की जनता"
अनिल विज ने बढ़ती जनसंख्या और पुरानी सीटों के गणित को समझाते हुए कहा कि आज परिसीमन करना अनिवार्य हो चुका है। उन्होंने डेटा का हवाला देते हुए बताया कि लोकसभा की सीटें आज भी 1976 के स्तर पर ही सीमित हैं, जबकि आबादी कई गुना बढ़ चुकी है। विज के मुताबिक, देश में करीब 172 सीटें ऐसी हैं जहां की जनसंख्या 20 लाख से भी ज्यादा है। ऐसे में एक सांसद के लिए अपनी पूरी जनता की शिकायतों और समस्याओं को सुनना लगभग नामुमकिन है। विपक्ष ने जनहित के इस महत्वपूर्ण सुधार को रोककर जनता के साथ विश्वासघात किया है।
राहुल गांधी की 'दोहरी नागरिकता' पर विज का वार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दोहरी नागरिकता मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश पर भी अनिल विज ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह एक बेहद गंभीर मामला है। विज ने कहा, "लंदन की नागरिकता को लेकर जो आरोप राहुल गांधी पर लगे हैं, अब कोर्ट ने उन पर जांच के आदेश दिए हैं। कानून अपना काम करेगा और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।" उन्होंने कहा कि फिलहाल यह शुरुआती जांच है, जिसके बाद ही पूरी सच्चाई देश के सामने आएगी।
दुष्यंत चौटाला के साथ बदतमीजी पर जताई नाराजगी
पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के काफिले को रोके जाने और उनके साथ बदसलूकी के मामले पर भी विज ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी के मान-सम्मान को ठेस पहुँचाना कतई स्वीकार्य नहीं है। विज ने कहा, "कानून व्यवस्था को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन जनता और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच सम्मान का रिश्ता बना रहना चाहिए। ऐसी घटनाएं सभ्य समाज में शोभा नहीं देतीं।"