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अंबाला में जासूसी कांड: नेशनल हाईवे पर मिले संदिग्ध कैमरे, पाकिस्तान से जुड़े तार

Apr 18, 2026 4:58 PM

अंबाला। हरियाणा के अंबाला में राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक बड़ी और बेहद संवेदनशील साजिश का पर्दाफाश हुआ है। नेशनल हाईवे-152 के ओवरब्रिज पर लगे दो ऐसे संदिग्ध सीसीटीवी कैमरे बरामद हुए हैं, जिनकी जानकारी न तो स्थानीय पुलिस को थी और न ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी को। ये कैमरे कोई साधारण उपकरण नहीं थे; इन्हें चलाने के लिए बकायदा सोलर पैनल लगाए गए थे और डेटा भेजने के लिए सिम कार्ड का इस्तेमाल हो रहा था। इस बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं, क्योंकि प्राथमिक तफ्तीश इशारा कर रही है कि इन कैमरों का रिमोट कंट्रोल सरहद पार पाकिस्तान में बैठे आकाओं के पास हो सकता है।

कैसे हुआ खुलासा? एक साधारण जांच ने खोली बड़ी साजिश की परतें

इस जासूसी तंत्र का पता तब चला जब सेक्टर-9 थाने के एएसआई रविश कुमार नेशनल हाईवे-44 पर एक अन्य मामले की जांच के लिए देवीनगर के पास पहुँचे थे। वहां उनकी नजर एनएच-152 के ओवरब्रिज पर लगे दो कैमरों पर पड़ी। संदेह होने पर जब उन्होंने टोल मैनेजर विनोद कुमार और ट्रैफिक पुलिस इंचार्ज जोगिंदर सिंह से संपर्क किया, तो दोनों ने ही इन कैमरों से पल्ला झाड़ लिया। अधिकारियों ने साफ किया कि विभाग की ओर से इस लोकेशन पर कोई कैमरा इंस्टॉल नहीं किया गया है। बस यहीं से पुलिस का शक यकीन में बदल गया कि ये कैमरे किसी गहरी साजिश का हिस्सा हैं।

गाजियाबाद कनेक्शन: जासूसों का जाल और अंबाला की घेराबंदी

मामले की गंभीरता को देखते हुए अंबाला पुलिस ने तुरंत इन कैमरों को कब्जे में लेकर सुरक्षित रख लिया है। सूत्रों की मानें तो यह पूरा घटनाक्रम गाजियाबाद में हाल ही में पकड़े गए जासूसी गिरोह से जुड़ा हुआ है। गाजियाबाद में गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया था कि वे देश के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और रणनीतिक हाईवे की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। चूंकि अंबाला एक महत्वपूर्ण वायु सेना स्टेशन (Air Force Station) और सैन्य छावनी है, इसलिए यहां हाईवे पर इस तरह के कैमरों का मिलना किसी बड़े हमले या जासूसी की तैयारी की ओर इशारा करता है।

प्रोडक्शन वारंट पर आएंगे आरोपी; रडार पर 'स्लीपर सेल'

अंबाला पुलिस अब गाजियाबाद में पकड़े गए आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लाने की तैयारी कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि ये कैमरे कब लगाए गए और इनके जरिए किस तरह का डेटा लीक किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि स्थानीय स्तर पर किसी 'स्लीपर सेल' ने इन कैमरों को लगाने में मदद की होगी। फिलहाल, पूरे जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है और रणनीतिक महत्व के अन्य पुलों और हाईवे की भी गहन चेकिंग की जा रही है।

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