- by Vinita Kohli
- Nov, 01, 2025 05:45
चंडीगढ़: हरियाणा के डीजीपी यानी पुलिस महानिदेशक ने आज यानी सोमवार को नई ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कि है जिसमें शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों को जेल भेजने की बात कही गई। इस एडवाइजरी में उन्होंने हरियाणा में जनवरी से अक्टूबर तक हुई सड़क दुर्घटनाओं में 4000 मौतों का जिक्र किया है। उन्होंने प्रदेश के सभी चौकी इंचार्जों, ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों, कर्मचारियों और एसएचओ एवं डीएसपी को निर्देश दिए हैं कि वह ब्लाइंड स्पॉट, एक्सीडेंट हॉट स्पॉट की पहचान करें। इसको लेकर डीजीपी ने एक लेटर जारी की है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि मैं चाहूंगा कि आप इसे एक मानव-निर्मित आपदा समझें जिसे प्रयास से कम किया जा सकता है।
डीजीपी द्वारा दिए गए निर्देशों में कहा गया
1. सड़क दुर्घटनाओं में 4000 मौतों का जिक्र: DGP ने अपने लेटर में लिखा है, हरियाणा पुलिस के मेरे प्रिय चौकी इंचार्ज, ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी एवं कर्मी, एसएचओ एवं डीएसपी, मैं आपका ध्यान सड़क दुर्घटना में हो रहे जानी नुकसान की और आकर्षित करना चाहूंगा। इस साल जनवरी-अक्टूबर की अवधि में हरियाणा में लगभग 4,000 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुई है। ये राज्य में इस अवधि में हत्या में हुए 800 मौतों से पांच गुना ज्यादा है। मरने वाले ज्यादातर बीस-तीस साल के होते हैं, घर की रोटी कमा रहे होते हैं। घायलों की संख्या इनसे कहीं ज्यादा है। इलाज में लाखों खर्च होते हैं। कई तो पूरी उम्र के लिए अपाहिज हो जाते हैं। मैं चाहूंगा कि आप इसे एक मानव-निर्मित आपदा समझें जिसे प्रयास से कम किया जा सकता है।
2. ब्लाइंड स्पॉट, एक्सीडेंट हॉटस्पॉट की पहचान करें: लेटर में डीजीपी ने लिखा है, आप से अपेक्षा है कि आप अपने इलाके में ब्लाइंड स्पॉट, एक्सीडेंट हॉटस्पॉट की पहचान करें। वहां हो रहे दुर्घटना के कारणों का पता करें और उसे लग के ठीक करायें। ये सुनिश्चित करें कि सड़क पर ख़राब होकर को कोई गाड़ी खड़ी ना रहे। उसे सड़क से फौरन हटवायें। जब तक नहीं हटता, तब तक रिफ्लेक्टिव टैप वाले कोन लगाएं, जिससे कि खड़ी गाड़ी दूर से दिखाई दे।
3. शराब पीकर गाड़ी चलाने को जेल जरूर भेजें: शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों को पंद्रह-बीस दिन के लिए जेल जरूर भेजें। जहां ओवर स्पीडिंग की संभावना है वहां इफेक्टिव नाके लगाएं, बेदर्दी से चालान ठोंके। ऐसे सिरफिरों की वजह से सड़कें फायरिंग रेंज से भी ज्यादा खतरनाक हो जाती है।ट्रक ऑपरेटरों से मिलकर ये तय करें कि उनके ड्राइवर प्रशिक्षित हैं और उनके यहां ड्राइवरों को जरूरी आराम देने की प्रथा है। टारगेट टाइम पूरा करने के चक्कर में गाड़ियां चौबीसों घंटे चलती रहती है। ऐसे में दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्हें बतायें कि जांच की आंच उन तक भी पहुंच सकती है।