हरियाणा में थमेंगे दमकल की गाड़ियों के पहिए: 8-9 अप्रैल को फायर फाइटर्स की बड़ी हड़ताल, सरकार को दी सीधी चेतावनी
Mar 14, 2026 12:06 PM
हरियाणा। हरियाणा में अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की रक्षा करने वाले दमकल कर्मियों का धैर्य अब जवाब दे गया है। 'न्याय नहीं तो काम नहीं' के संकल्प के साथ हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन ने 8 और 9 अप्रैल को समूचे प्रदेश में पूर्ण कार्य बहिष्कार की घोषणा की है। इस दो दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल को लेकर कर्मचारियों में भारी रोष है। यूनियन का आरोप है कि सरकार उनके जायज हकों और शहीद साथियों की शहादत को दरकिनार कर रही है, जिसके विरोध में अब सड़कों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
भिवानी में गरजी यूनियन: नोटिस थमाकर किया शक्ति प्रदर्शन
इस आंदोलन की जमीन तैयार करने के लिए यूनियन के राज्यस्तरीय नेताओं ने चार विशेष टीमों का गठन किया है, जो हरियाणा के कोने-कोने में स्थित 103 अग्निशमन केंद्रों पर जाकर कर्मचारियों को लामबंद कर रही हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को जब यूनियन का जत्था भिवानी दमकल केंद्र पहुंचा, तो माहौल पूरी तरह से चुनावी रण जैसा नजर आया। यहां कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए केंद्र अधिकारी रमन कुमार को हड़ताल का औपचारिक नोटिस सौंपा। सभा के दौरान गूंजते नारों ने यह साफ कर दिया कि इस बार दमकल कर्मी झुकने के मूड में नहीं हैं।
शहीदों के सम्मान पर सरकार की चुप्पी से नाराजगी
यूनियन के राज्य प्रधान राजेंद्र सिंह और महासचिव गुलशन भारद्वाज ने सभा को संबोधित करते हुए सरकार की नियत पर तीखे सवाल उठाए। नेताओं का मुख्य दर्द शहीद फायर फाइटर भविचंद और रणवीर सिंह को लेकर है। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले इन बहादुर साथियों को वह सम्मान और मुआवजा नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। राजेंद्र सिंह ने कड़े शब्दों में कहा, "हरियाणा सरकार का न्याय सामान्य नहीं बल्कि दोयम दर्जे का है। अपनों को खोने के बाद भी अगर हमें न्याय के लिए सड़कों पर भीख मांगनी पड़े, तो यह शासन की विफलता है।"
अग्निशमन केंद्रों पर जनसंपर्क अभियान तेज
हड़ताल को ऐतिहासिक बनाने के लिए कर्मचारी नेता अब कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते। शनिवार से अभियान को और तेज किया जाएगा, जिसमें कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और जोखिम भत्ते जैसी पुरानी मांगों को भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि अग्निशमन सेवा एक अनिवार्य सेवा है, लेकिन उनकी मांगों को हमेशा ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यदि 8 और 9 अप्रैल की इस सांकेतिक हड़ताल के बाद भी सरकार की नींद नहीं खुली, तो इस आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदलने की चेतावनी भी दी गई है।