हरियाणा बैंक घोटाला: अब रसूखदारों से मिलना अधिकारियों को पड़ेगा भारी, सरकार ने जारी की नई SOP
Apr 20, 2026 1:43 PM
हरियाणा। चंडीगढ़ के गलियारों में इन दिनों बैंक घोटालों की गूंज और अधिकारियों के बीच व्याप्त असहजता साफ महसूस की जा सकती है। घोटालों में सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता की खबरों के बाद हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था की 'सर्जरी' करने का फैसला किया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने साफ कर दिया है कि भविष्य में भ्रष्टाचार के ऐसे किसी भी 'लूपहोल' को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के बीच बढ़ते अनौपचारिक संबंधों ने ही घोटालों के लिए रास्ता साफ किया है। इसी कड़ी में अब एक ऐसी एसओपी तैयार की जा रही है, जो अधिकारियों के काम करने के पारंपरिक तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल देगी।
फाइल पर दर्ज होगी पहली मुलाकात की कहानी
नई प्रस्तावित एसओपी की सबसे चौंकाने वाली और सख्त शर्त यह है कि अब अधिकारियों को यह लिखित में देना होगा कि वे किसी निजी व्यक्ति या संस्था के प्रतिनिधि से पहली बार कब और क्यों मिले। सरकार का तर्क है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी बाहरी व्यक्ति से मुलाकात के दौरान औपचारिक मर्यादा का पालन करें और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत विजिलेंस (सतर्कता विभाग) को रिपोर्ट करें। साथ ही, संवेदनशील डेटा या जानकारी साझा करने के लिए केवल सरकारी ईमेल और आधिकारिक चैनलों का उपयोग करना ही सुरक्षित माना जाएगा।
उपहारों से तौबा और 'ना' कहने की जिम्मेदारी
प्रशासनिक स्तर पर जारी इन निर्देशों में एक बड़ा हिस्सा 'व्यवहारिक सतर्कता' से जुड़ा है। आईएएस अधिकारियों को विशेष रूप से आगाह किया गया है कि वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ फोटो खिंचवाने से बचें। अक्सर ऐसी तस्वीरों का इस्तेमाल अधिकारी से करीबी दिखाने और प्रभाव जमाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, उपहार और निजी निमंत्रणों को स्वीकार करना अब 'हितों का टकराव' (Conflict of Interest) माना जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल "मौखिक निर्देश" के आधार पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। फाइलों पर नोटिंग और नियमों का हवाला देना अनिवार्य होगा। मुख्य सचिव का संदेश स्पष्ट है: प्रशासनिक हित में "ना" कहना भी अब अधिकारी की जिम्मेदारी का हिस्सा है।