बिलिंग के नाम पर 'झटके' देने वाले बिजली निगम पर आयोग की गाज, उपभोक्ताओं को मुआवजा देने का फरमान
Mar 14, 2026 1:07 PM
हरियाणा। हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं को गलत बिल थमाकर दफ्तरों के चक्कर कटवाने वाले अधिकारियों और लचर सॉफ्टवेयर सिस्टम की अब खैर नहीं है। 'हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन' ने बिजली बिलिंग में हो रही लापरवाहियों पर बिजली वितरण निगमों को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने दो अलग-अलग शिकायतों की सुनवाई के दौरान यह पाया कि विभाग की तकनीकी खामियों के कारण उपभोक्ताओं को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसी के मद्देनजर आयोग ने पीड़ित उपभोक्ताओं को मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।
सॉफ्टवेयर की 'गणित' में उलझा विभाग
मामला अंबाला जिले से जुड़ा है, जहां उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) की बिलिंग प्रणाली में एक अजीबोगरीब खामी उजागर हुई। जांच में पता चला कि बिलिंग सॉफ्टवेयर ने 'मल्टीप्लाइंग फैक्टर' (MF) को 1 के बजाय 0.1 दर्ज कर लिया। तकनीकी तौर पर विभागीय अधिकारियों का भी मानना है कि यह फैक्टर 1 से कम नहीं हो सकता।
आयोग ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि यदि सॉफ्टवेयर में मानकों की कोई सीमा (Limit) तय होती, तो सिस्टम 0.1 की एंट्री को स्वीकार ही नहीं करता। यह साफ तौर पर तकनीकी लापरवाही है, जिसके कारण उपभोक्ताओं को गलत बिल जारी हुए।
चीफ इंजीनियर से मांगा जवाब, तकनीकी सुधार के निर्देश
आयोग के कड़े रुख को देखते हुए उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के चीफ इंजीनियर (IT) को तलब किया गया है। उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है कि सिस्टम ने गलत डाटा को कैसे स्वीकार किया और भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोकने के लिए क्या 'फायरवॉल' या सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। आयोग ने दोटूक कहा कि बिजली बिलिंग जैसी अनिवार्य सेवा में ऐसी तकनीकी चूक अक्षम्य है।
आम जनता को मिलेगा 'हक' का मुआवजा
आयोग ने स्पष्ट किया कि 'सेवा का अधिकार अधिनियम' के तहत तय समय सीमा में सही बिल प्रदान करना विभाग की जिम्मेदारी है। यदि विभाग की ओर से तकनीकी या प्रशासनिक देरी होती है, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। आयोग का यह फैसला उन हजारों उपभोक्ताओं के लिए एक नजीर साबित होगा जो अक्सर गलत रीडिंग या सॉफ्टवेयर की गलतियों के कारण बिजली दफ्तरों की चौखट पर बिल ठीक करवाने के लिए खड़े रहते हैं।