हरियाणा में 3 अप्रैल से फिर आएगा भारी तूफान, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
Apr 01, 2026 10:15 AM
हरियाणा। हरियाणा के खेतों में जिस फसल को देखकर किसान अपनी खुशहाली के सपने बुन रहा था, उसे बेमौसम बारिश और ओलों ने मिट्टी में मिला दिया है। प्रदेश के दक्षिणी और पश्चिमी जिलों में कल जो मंजर दिखा, उसने किसानों की आंखों में आंसू ला दिए। हिसार, सिरसा, रेवाड़ी और भिवानी में तेज हवाओं के साथ गिरे ओलों ने गेहूं की खड़ी फसल को पूरी तरह बिछा दिया है। सरसों और चने की खेती को भी इस ओलावृष्टि ने बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट का डर सता रहा है।
आंधी और ओलों ने मचाई तबाही, सब्जी उत्पादक भी परेशान
सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि सब्जियों की खेती करने वाले किसान भी इस कुदरती मार से कराह उठे हैं। बेल वाली सब्जियों और फलों के फूल झड़ जाने से बागवानी को तगड़ा झटका लगा है। कई इलाकों में तो ओले इतने बड़े थे कि गेहूं की बालियां टूटकर खेत में ही बिखर गईं। किसानों का कहना है कि साल भर की मेहनत पर ऐन वक्त पर पानी फिर गया। अब कटाई के समय खेतों में पानी जमा होने से दाने के काले पड़ने और गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
ठंडी हवाओं की वापसी, तापमान में दर्ज हुई गिरावट
इस बेमौसम बरसात ने मार्च-अप्रैल की गर्मी को फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। प्रदेश के अधिकतम तापमान में 0.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान में 1.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। बारिश के बाद चली सर्द हवाओं ने मौसम का मिजाज ऐसा बदला कि लोगों को एक बार फिर पंखे बंद कर चादर ओढ़नी पड़ गई। हालांकि, आम आदमी के लिए यह ठंडक सुखद हो सकती है, लेकिन पकी हुई फसल के लिए यह 'जहर' साबित हो रही है।
मौसम विभाग की नई चेतावनी: अभी टला नहीं है खतरा
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, राहत की उम्मीद फिलहाल कम ही है। डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि 1 और 2 अप्रैल को उत्तरी हरियाणा में बूंदाबांदी हो सकती है। लेकिन असली चिंता 3 अप्रैल से शुरू होने वाले नए पश्चिमी विक्षोभ को लेकर है। यह सिस्टम पिछले वाले से ज्यादा ताकतवर बताया जा रहा है, जिससे 5 अप्रैल तक प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में फिर से आंधी, गरज-चमक और बारिश के आसार हैं। प्रशासन ने किसानों को सतर्क रहने और कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी है।