हरियाणा में मौसम का यू-टर्न: 30 मार्च तक बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट, किसानों की बढ़ी धड़कनें
Mar 27, 2026 10:23 AM
हरियाणा। चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में शुक्रवार दोपहर बाद अचानक बदले मौसम ने गर्मी से राहत तो दी है, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को प्रभावित कर रहा है। इसका सीधा असर अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और करनाल सहित उत्तरी हरियाणा के जिलों में देखने को मिल रहा है, जहां आसमान में बादलों का डेरा है और रुक-रुक कर बूंदाबांदी का दौर शुरू हो चुका है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिलसिला 30 मार्च तक जारी रह सकता है।
30 मार्च तक बदलेगा मौसम का मिजाज, ओलावृष्टि की भी आशंका
हिसार कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि 28 और 29 मार्च को इस विक्षोभ का प्रभाव अपने चरम पर होगा। इस दौरान प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कई स्थानों पर मेघ गर्जन के साथ मध्यम दर्जे की बारिश और छिटपुट ओलावृष्टि की भी संभावना बनी हुई है। मौसम में आए इस अचानक बदलाव से पिछले कुछ दिनों से बढ़ रहे तापमान पर लगाम लगेगी और लोगों को उमस भरी गर्मी से फिलहाल निजात मिलेगी।
गेहूं की फसल पर मंडराया खतरा, किसान असमंजस में
यह मौसम आम जनमानस के लिए सुहावना हो सकता है, लेकिन अन्नदाता के लिए यह किसी आफत से कम नहीं है। मार्च का आखिरी सप्ताह हरियाणा में गेहूं की कटाई का चरम समय होता है। इस समय यदि तेज हवाओं के साथ बारिश होती है, तो फसल खेतों में बिछ सकती है, जिससे दानों की चमक फीकी पड़ने और पैदावार घटने का डर रहता है। दक्षिणी हरियाणा के नूंह, सिरसा और फतेहाबाद जैसे जिलों में, जहां पारा 35 डिग्री के करीब पहुंच चुका था, वहां फसल तेजी से पक रही है, ऐसे में बारिश का पानी दानों की गुणवत्ता खराब कर सकता है।
कृषि विभाग की एडवाइजरी: कटाई और सिंचाई रोकें
बिगड़ते मौसम को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि जिन किसानों ने अभी तक कटाई शुरू नहीं की है, वे फिलहाल सिंचाई बिल्कुल न करें, क्योंकि गीली मिट्टी में तेज हवा चलने से फसल गिरने का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं, जो किसान फसल की कटाई कर चुके हैं, वे अनाज को सुरक्षित स्थानों या तिरपाल से ढक कर रखें। मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ी फसल को भी भीगने से बचाने के लिए मार्केट कमेटियों को निर्देश दिए गए हैं।