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हरियाणा में मौसम का तांडव: 11 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट, तापमान में आई भारी गिरावट

May 04, 2026 10:31 AM

हरियाणा। मई की शुरुआत में जहां लोग लू और झुलसा देने वाली गर्मी की उम्मीद कर रहे थे, वहीं हरियाणा में मौसम ने पूरी बाजी पलट दी है। बीती रात हिसार, सिरसा, भिवानी और महेंद्रगढ़ में अचानक आए तेज अंधड़ के बाद हुई ओलावृष्टि ने रेगिस्तानी गर्मी का अहसास कम कर दिया। गुरुग्राम और फतेहाबाद जैसे शहरों में हुई मूसलाधार बारिश ने सड़कों को जलमग्न कर दिया, तो वहीं ग्रामीण इलाकों में गिरते ओलों ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

11 जिलों में 'ऑरेंज अलर्ट': 50 की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे और आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने कैथल, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, सोनीपत, पानीपत, हिसार, भिवानी, जींद और चरखी दादरी के लिए कड़ा अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। साथ ही, आसमानी बिजली चमकने और कुछ संवेदनशील इलाकों में दोबारा ओलावृष्टि होने का खतरा मंडरा रहा है। कुरुक्षेत्र और करनाल जैसे धान बेल्ट वाले जिलों में भी मध्यम दर्जे की बारिश के आसार जताए गए हैं।

पारे में भारी गिरावट, नारनौल भी पड़ा नरम

इस अचानक हुई मौसमी हलचल का सीधा असर तापमान के आंकड़ों पर दिखा है। प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान एक ही झटके में 3.2 डिग्री सेल्सियस नीचे आ गया है। जो नारनौल पिछले दिनों आग उगल रहा था, वहां भी पारा 37 डिग्री के करीब सिमट गया है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 24 घंटों में तापमान में 3 से 4 डिग्री की और गिरावट आ सकती है। इससे फिलहाल राज्यवासियों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिलती दिख रही है और दिन के समय चलने वाली गर्म हवाओं के तेवर ढीले पड़ गए हैं।

6 मई तक नहीं थमने वाला बारिश का सिलसिला

चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डॉ. मदन खीचड़ ने 'जग मार्ग' को बताया कि वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से प्रदेश में मौसम लगातार परिवर्तनशील बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 6 मई तक प्रदेशवासियों को धूप और बारिश की लुका-छिपी देखने को मिलेगी। हालांकि, यह बारिश गर्मी से राहत तो दे रही है, लेकिन कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खुले में पड़ी फसल या अनाज को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतें, क्योंकि तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है।

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