हरियाणा वेदर : आज रात से बदलेगा मौसम, इन 8 जिलों में बारिश और ओले गिरने का अलर्ट
Mar 25, 2026 10:05 AM
हरियाणा। हरियाणा में होली के बाद अब मौसम का मिजाज एक बार फिर बिगड़ने वाला है। चंडीगढ़ मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, प्रदेश में बैक-टू-बैक दो पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) दस्तक देने जा रहे हैं। इसका पहला असर आज यानी 25 मार्च की रात से ही दिखाई देने लगेगा। पिछले कुछ दिनों से बढ़ते पारे और धूप की तपिश झेल रहे हरियाणा वासियों के लिए यह बदलाव गर्मी से राहत तो लाएगा, लेकिन साथ में तेज हवाएं और ओलावृष्टि की चुनौती भी खड़ी करेगा। फिलहाल दिन का तापमान 29 डिग्री के आसपास बना हुआ है, जिसमें आने वाले 48 घंटों में बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है।
इन जिलों में ओलावृष्टि और तेज हवाओं का अलर्ट
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन की मानें तो इस सप्ताह राज्य के मौसम में स्थिरता नहीं रहेगी। पहला सिस्टम सक्रिय होने के बाद 26 और 27 मार्च को सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, जींद, करनाल, पानीपत और सोनीपत जैसे जिलों में धूल भरी हवाओं के साथ मध्यम बारिश होने के आसार हैं। हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है। राहत की बात यह है कि 29 मार्च की रात को एक और ताकतवर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसके प्रभाव से 30 और 31 मार्च को पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश की संभावना है। यानी मार्च की विदाई ठिठुरन और नमी के साथ होने वाली है।
किसानों की बढ़ी धड़कनें, कृषि विभाग ने जारी की एडवायजरी
मौसम के इस बदलते तेवर ने खेतों में खड़ी और खलिहानों में पड़ी फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कृषि उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग ने विशेष रूप से सरसों उत्पादक किसानों को सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने सलाह दी है कि किसान कटी हुई सरसों को बिखेर कर न छोड़ें, क्योंकि तेज हवाओं के चलते फसल के उड़ने और भीगने का खतरा है। डॉक्टर सिहाग ने कहा कि किसान कटी हुई फसल को छोटे-छोटे ढेरों में गैप बनाकर इकट्ठा करें ताकि हवा का संचार बना रहे और बारिश होने पर भी नुकसान कम हो।
गेहूं की कटाई में जल्दबाजी न करें किसान
प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में गेहूं की फसल अब पकने की कगार पर है, लेकिन बदलते मौसम को देखते हुए विशेषज्ञों ने फिलहाल कटाई रोकने की सलाह दी है। कृषि विभाग का कहना है कि 31 मार्च तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, ऐसे में गेहूं की कटाई में जल्दबाजी करना फसल की गुणवत्ता को खराब कर सकता है। नमी के कारण दानों के काले पड़ने या फसल के बिछने का डर बना रहता है। मौसम साफ होने के बाद ही किसानों को कंबाइन या मैन्युअल कटाई की योजना बनानी चाहिए।