हरियाणा की मंडियों में 1 अप्रैल से सजेगी गेहूं की ढेरी: हाई-टेक पहरे में होगी खरीद, किसानों के लिए बदले नियम
Mar 14, 2026 1:57 PM
हरियाणा। हरियाणा के अन्नदाताओं के लिए फसल की कटाई और उसे बेचने का समय नजदीक आ गया है। नायब सैनी सरकार ने ऐलान किया है कि आगामी 1 अप्रैल से प्रदेशभर में गेहूं की सरकारी खरीद का आगाज होगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने इस बार रबी खरीद सीजन 2026-27 को 'पारदर्शिता और तकनीक' का नया चेहरा देने की तैयारी की है। प्रदेश की 416 मंडियों में इस बार गेहूं की आवक से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया पर डिजिटल नजर रखी जाएगी।
जीपीएस और जियो-फेंसिंग से रुकेगी धांधली
राज्य मंत्री राजेश नागर ने बताया कि इस बार ई-खरीद पोर्टल को नए कलेवर में अपग्रेड किया गया है। सबसे बड़ा बदलाव 'जियो-फेंसिंग' के रूप में सामने आया है। अब कोई भी आढ़ती या बिचौलिया मंडी के दायरे से बाहर बैठकर फर्जी गेट पास या आई-फॉर्म जारी नहीं कर पाएगा। सिस्टम तभी काम करेगा जब ऑपरेटर मंडी की भौगोलिक सीमा के भीतर होगा। इसके अलावा, मंडी में प्रवेश करने वाले हर वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और उसकी फोटो मौके पर ही कैप्चर की जाएगी। यदि वाहन का नंबर पोर्टल पर दर्ज नहीं होगा, तो आवक गेट पास जारी नहीं किया जाएगा।
चार एजेंसियां संभालेंगी मोर्चा
खरीद प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए जिम्मेदारियों का बंटवारा कर दिया गया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के साथ-साथ हैफेड (HAFED), हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन और भारतीय खाद्य निगम (FCI) संयुक्त रूप से खरीद का कार्य करेंगे। सरकार का दावा है कि किसानों को मंडी में अपनी फसल बेचने के लिए घंटों इंतजार नहीं करना होगा। मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को उनके शेड्यूल के अनुसार ही मंडियों में बुलाया जाएगा, ताकि भीड़भाड़ और अव्यवस्था से बचा जा सके।
किसानों के हित में कड़े निर्देश
सरकार ने स्पष्ट किया है कि खरीद प्रक्रिया के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। मंडियों में पीने के पानी, छाया और सफाई के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश उपायुक्तों को दे दिए गए हैं। राज्य मंत्री नागर ने भरोसा दिलाया कि किसानों की फसल का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाएगा और भुगतान सीधा उनके बैंक खातों में समयबद्ध तरीके से ट्रांसफर किया जाएगा। इस बार की सख्ती का मुख्य उद्देश्य बाहरी राज्यों से आने वाले गेहूं की अवैध एंट्री को रोकना है, ताकि हरियाणा के मूल किसानों को उनका वाजिब हक मिल सके।