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हरियाणा राज्यसभा चुनाव: तरुण भंडारी की कांग्रेस को चेतावनी, 25 करोड़ के आरोपों पर होगा मानहानि का केस

Apr 08, 2026 10:59 AM

हरियाणा।  हरियाणा की सियासत में राज्यसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ जुबानी जंग अब कानूनी दहलीज तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के राजनीतिक सलाहकार तरुण भंडारी ने कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए '25-25 करोड़ रुपये' में विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों पर कड़ा ऐतराज जताया है। चंडीगढ़ में मीडिया से रूबरू होते हुए भंडारी ने सीधी चेतावनी दी कि आरोप लगाने वाले नेता यह साबित करें कि पैसा कब, कहां और किसे दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना सिर-पैर की बातें कर सरकार की छवि धूमिल करने वालों के विरुद्ध अवमानना और लीगल एक्शन की तैयारी पूरी कर ली गई है।

अनुशासन समिति पर वार: 'शीशे के घरों में रहने वाले दूसरों पर पत्थर न फेंकें'

भंडारी ने कांग्रेस द्वारा गठित अनुशासन समिति के वजूद और उसके सदस्यों की निष्ठा पर भी तीखे सवाल दागे। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद दूसरी पार्टियों से होकर आए हैं, वे दूसरों को नैतिकता का पाठ कैसे पढ़ा सकते हैं? अनिल धंतौड़ी और कैलाशो सैनी जैसे नामों का जिक्र करते हुए उन्होंने तंज कसा कि ये नेता खुद कभी अनुशासन में नहीं रहे। भंडारी के मुताबिक, कांग्रेस का यह आंतरिक मामला जरूर है, लेकिन जनता सब देख रही है कि कैसे दशकों तक पार्टी के लिए दरी बिछाने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर एक 'रिटायर्ड कर्मचारी' को रातों-रात राज्यसभा का टिकट थमा दिया गया।

'स्याही कांड' की दिलाई याद, हुड्डा से पूछे तीखे सवाल

विपक्ष पर हमलावर होते हुए तरुण भंडारी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को इतिहास के पन्ने पलटने की सलाह दी। उन्होंने चर्चित 'स्याही कांड' और राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा के चुनाव के दौरान रद्द हुए वोटों का हवाला देते हुए पूछा कि उस वक्त कांग्रेस ने अपने 'गलती' करने वाले नेताओं पर क्या कार्रवाई की थी? भंडारी ने दावा किया कि विधायकों ने किसी दबाव या लालच में नहीं, बल्कि अपनी 'अंतरात्मा की आवाज' पर वोट डाला है। उन्होंने कहा कि कर्मबीर बौद्ध को प्रत्याशी बनाने के फैसले से खुद कांग्रेस के अधिकांश विधायक भीतर ही भीतर नाराज थे, जिसका नतीजा सबके सामने है।

पुराने कांग्रेसी हाशिए पर, चहेतों की चांदी

मुख्यमंत्री के सलाहकार ने कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर हैरानी जताते हुए कहा कि जिस पार्टी में सालों से संघर्ष कर रहे नेताओं को पार्षद तक का टिकट नहीं मिलता, वहां सचिवालय के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को सीधे राज्यसभा भेज दिया जाना कार्यकर्ताओं का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि महज दो-चार रसूखदार लोगों को खुश कर यह टिकट हासिल किया गया, जिससे कांग्रेस का जमीनी कैडर बुरी तरह टूटा हुआ है। भंडारी ने दोहराया कि अब आरोपों की राजनीति नहीं चलेगी और कोर्ट में इसका हिसाब मांगा जाएगा।

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