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गर्मियों में स्विमिंग का शौक कहीं छीन न ले आंखों की रोशनी, पूल में जाने से पहले पढ़ें ये जरूरी गाइडलाइन

May 27, 2026 12:15 PM

पारे के चालीस डिग्री पार जाते ही शहरों में वॉटर पार्क और स्विमिंग पूल्स पर भीड़ उमड़ने लगी है। गर्मी से फौरी राहत पाने का यह तरीका जितना मजेदार है, आंखों की सेहत के लिए उतना ही संवेदनशील भी। दरअसल, सार्वजनिक पूल्स के पानी को बैक्टीरिया-मुक्त रखने के लिए भारी मात्रा में क्लोरीन और अन्य ब्लीचिंग केमिकल्स मिलाए जाते हैं। जब यह केमिकल युक्त पानी हमारी नाजुक आंखों के सीधे संपर्क में आता है, तो आंखों की सुरक्षा करने वाली प्राकृतिक आंसू की परत (Tear Film) धुल जाती है। नतीजा होता है—आंखों का अचानक लाल होना, चुभन और तेज खुजली।

कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर पूल में कूदना यानी बड़ी आफत को दावत

आजकल युवाओं में कॉन्टैक्ट लेंस लगाने का चलन काफी बढ़ गया है, लेकिन इसे लगाकर पूल में उतरना आंखों के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ है। नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि पूल के पानी में 'अकांथअमीबा' नामक एक खतरनाक सूक्ष्मजीव पाया जाता है। जब कोई व्यक्ति लेंस पहनकर तैरता है, तो यह बैक्टीरिया लेंस और आंख की पुतली के बीच फंस जाता है। वहां इसे पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिलता है, जो बाद में कॉर्नियल अल्सर का रूप ले लेता है। कई मामलों में इसके कारण मरीजों को अपनी आंखों की रोशनी तक गंवानी पड़ी है। इसलिए तैरने से पहले लेंस को उतारकर डिब्बी में बंद करना कभी न भूलें।

गॉगल्स हैं जरूरी, पर तैरने के बाद क्या करें?

अगर आप पूल का आनंद सुरक्षित तरीके से लेना चाहते हैं, तो कुछ बुनियादी आदतों को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाना होगा। सबसे पहले, एक अच्छी क्वालिटी का स्विमिंग चश्मा (Goggles) खरीदें जो आंखों के चारों ओर एयर-टाइट ग्रिप बनाता हो। दूसरी बात, तैरने के बाद जैसे ही आप पूल से बाहर निकलें, तुरंत साफ और सादे पानी से आंखों को अच्छी तरह से फ्लश करें (धोएं)। इससे पलकों और कोनों में फंसा हुआ केमिकल बाहर निकल जाता है।

रगड़ने की गलती पड़ेगी भारी, पूल की सफाई भी जांचें

अक्सर पानी चले जाने पर लोग अनजाने में आंखों को हथेलियों से जोर-जोर से रगड़ने लगते हैं। ऐसा करने से कॉर्निया पर स्क्रैच (खरोंच) आने का खतरा रहता है। अगर खुजली हो भी रही है, तो साफ सूती रूमाल या स्टेरलाइज्ड टिश्यू का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, आंखें बंद करके किसी भी पूल में न कूदें; पहले यह सुनिश्चित करें कि वहां वाटर रीसाइक्लिंग सिस्टम सही से काम कर रहा हो और पानी पूरी तरह पारदर्शी हो। गंदे या ठहरे हुए पानी वाले पूल बीमारियों के घर होते हैं। अगर घर लौटने के बाद भी आंखों की लाली 24 घंटे से ज्यादा बनी रहे या धुंधलापन महसूस हो, तो खुद डॉक्टर बनने के बजाय तुरंत किसी योग्य आई स्पेशलिस्ट को दिखाएं।

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