फास्टिंग बनाम पारंपरिक डाइट: क्या है सच्चाई? यहां जानें क्या कहता है नया अध्ययन

Feb 17, 2026

नई दिल्ली: पोषण के क्षेत्र में तेजी से लोकप्रिय हो रही इंटरमिटेंट फास्टिंग पर नए अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण में कहा गया है कि यह वजन घटाने के मामले में पारंपरिक आहार सलाह से अधिक प्रभावी नहीं है। यह निष्कर्ष ‘कोक्रेन कोलाबोरेशन’ द्वारा किए गए व्यापक विश्लेषण में सामने आया। समीक्षा में 2016 से 2024 के बीच उत्तरी अमेरिका, यूरोप, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में प्रकाशित 22 अध्ययनों को शामिल किया गया। इन अध्ययनों में कुल 1,995 अधिक वजन वाले वयस्क प्रतिभागियों पर छह से 12 महीने तक रुक-रुक कर उपवास के प्रभावों को परखा गया।


अध्ययन का दायरा और पद्धति

समीक्षा में शामिल सभी अध्ययन अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त वयस्कों पर केंद्रित थे। प्रतिभागियों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया, जिनमें कुछ को मानक आहार संबंधी सलाह दी गई, कुछ ने इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाई और कुछ को बिना किसी हस्तक्षेप के प्रतीक्षा सूची में रखा गया। मानक आहार सलाह में कैलोरी कम करना, फल-सब्जियों और साबुत अनाज पर आधारित भोजन या अन्य संतुलित आहार योजनाएं शामिल थीं। शोधकर्ताओं ने इन सभी समूहों के परिणामों की आपस में तुलना की।


वजन घटाने के परिणाम

21 अध्ययनों में शामिल 1,713 प्रतिभागियों के विश्लेषण से पता चला कि ऊर्जा-सीमित आहार और इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाने वाले समूहों में वजन घटाने का स्तर लगभग समान रहा। परिणामों में 10 प्रतिशत तक वजन घटने से लेकर एक प्रतिशत तक वजन बढ़ने के आंकड़े दर्ज किए गए। इससे संकेत मिला कि दोनों रणनीतियों का प्रभाव तुलनीय है और किसी एक को स्पष्ट रूप से बेहतर नहीं कहा जा सकता।


‘कोई हस्तक्षेप नहीं’ से तुलना

छह अध्ययनों में 448 प्रतिभागियों के बीच इंटरमिटेंट फास्टिंग की तुलना ऐसे समूह से की गई, जिसमें कोई आहार हस्तक्षेप नहीं किया गया था। इंटरमिटेंट फास्टिंग समूह में औसतन लगभग 5 प्रतिशत वजन घटा, जबकि नियंत्रण समूह में करीब 2 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। शोध मानकों के अनुसार 3 प्रतिशत का यह अंतर चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं माना जाता, इसलिए लेखकों ने इसे सीमित लाभ के रूप में आंका।


जीवन-गुणवत्ता और अन्य प्रभाव

समीक्षा में जीवन-गुणवत्ता पर भी इंटरमिटेंट फास्टिंग के प्रभाव का आकलन किया गया। उपलब्ध सीमित अध्ययनों के आधार पर इसका असर बहुत कम पाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ‘कोई हस्तक्षेप नहीं’ तुलना वाले केवल छह अध्ययन थे और उनकी पद्धतियों में विविधता थी। साथ ही, समीक्षा केवल 12 महीने तक की अवधि के अध्ययनों पर आधारित थी, जिससे दीर्घकालिक प्रभावों का स्पष्ट आकलन संभव नहीं हो सका।


संभावित लाभ और सावधानियां

कुछ अध्ययनों में इंटरमिटेंट फास्टिंग से रक्तचाप में कमी, मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम में कमी और चयापचय सुधार जैसे संभावित लाभों के संकेत मिले हैं। फिर भी समीक्षा का निष्कर्ष है कि इसे पारंपरिक आहार से बेहतर मानने के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। वर्तमान साक्ष्यों के अनुसार यह कुछ लोगों के लिए व्यवहारिक और सुरक्षित विकल्प हो सकता है, लेकिन किसी भी वजन घटाने की रणनीति को अपनाने से पहले व्यक्तिगत जीवनशैली और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। विशेषकर यदि कोई अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या हो तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करना उचित माना गया है।

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