बजट सत्र में हरियाणा के विकास को मिलेगी नई दिशा, जनकल्याण और सुशासन पर रहेगा फोकस: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

Feb 17, 2026

चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आगामी 20 फरवरी से शुरू होने जा रहे विधानसभा के बजट सत्र को प्रदेश के विकास के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ बताया है। चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026-27 का बजट केवल वित्तीय आवंटन का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि यह जन-आकांक्षाओं को पूरा करने और 'विकसित हरियाणा-2047' की नींव रखने वाला एक सशक्त आधार बनेगा।

उन्होंने अपनी सरकार के संकल्प पत्र को 'गीता' के समान पवित्र बताते हुए कहा कि सुशासन और पारदर्शिता उनकी सरकार की कार्यशैली का मूल मंत्र है।

बजट निर्माण में तकनीक और जनभागीदारी का संगम

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस बार का बजट तैयार करने में अभूतपूर्व जनभागीदारी सुनिश्चित की गई है। परंपरा के अनुसार विभिन्न हितधारकों के साथ 13 महत्वपूर्ण बैठकें की गईं, जिनमें 2,199 सुझाव प्राप्त हुए। सबसे खास बात यह रही कि प्रदेश सरकार ने इस बार AI चैटबॉट का अभिनव प्रयोग किया, जिसके माध्यम से लगभग 12,400 सुझाव प्राप्त हुए हैं। सरकार इनमें से कम से कम 4,000 से 5,000 बेहतरीन सुझावों को आगामी बजट में सम्मिलित करने की तैयारी कर रही है। यह कदम दर्शाता है कि सरकार नीति निर्धारण में तकनीक और जनता की सीधी राय को प्राथमिकता दे रही है।

मजबूत आर्थिक नींव और बढ़ती प्रति व्यक्ति आय

हरियाणा की अर्थव्यवस्था के आंकड़ों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) वर्ष 2025-26 में 12.67 प्रतिशत की शानदार दर से बढ़कर 13,67,769 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी हरियाणा ने देश के शीर्ष 5 राज्यों में अपनी जगह बनाई है।

वर्ष 2024-25 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 3,58,171 रुपये दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के उन दावों को भी खारिज किया जिसमें सरकारी खर्च में कमी की बात कही गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चालू वित्त वर्ष में विभागों का वास्तविक खर्च बजट का लगभग 98 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

औद्योगिक क्रांति और MSME का नया दौर

औद्योगिक मोर्चे पर हरियाणा की प्रगति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में निर्यात में भारी उछाल आया है। वर्ष 2015 से 2024 के बीच राज्य से 132.13 बिलियन डॉलर का निर्यात हुआ, जो उससे पिछले दस वर्षों के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है।

MSME सेक्टर में आई तेजी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 10 वर्षों में 20 लाख से अधिक नए पंजीकरण हुए हैं। उद्योगों और श्रमिकों के बीच बेहतर तालमेल के लिए सरकार ने देश में अपनी तरह की पहली 'उद्योग-श्रमिक मैत्री परिषद' का गठन भी किया है।

वित्त आयोग और रोजगार पर विपक्ष को जवाब

मुख्यमंत्री ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को प्रदेश के लिए बड़ी जीत बताया। उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि केंद्रीय करों में हरियाणा की हिस्सेदारी 1.093 प्रतिशत से बढ़कर 1.361 प्रतिशत हो गई है, जिससे हरियाणा अब देश के राज्यों में पहले स्थान पर आ गया है।

रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जहाँ 2004-14 के बीच रोजगार के अवसरों में कमी आई थी, वहीं 2023-24 तक प्रदेश में लगभग 27 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। विपक्ष विकास को देखने की नजर नहीं रखता और केवल झूठ की दुकान चला रहा है। हमारी सरकार ने अपने वादों को जमीन पर उतारने का काम किया है। संकल्प पत्र के 217 वादों में से 60 पहले ही पूरे हो चुके हैं और बाकी पर काम तेजी से जारी है।

हरियाणा सरकार अब 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ 'विकसित हरियाणा' का रोडमैप तैयार कर रही है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और कृषि को एकीकृत कर विकास की नई दिशा तय की जाएगी।

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