August 2, 2026

Hydrogen Train in Haryana: जींद, गोहाना और सोनीपत वालों की लॉटरी, जल्द शुरू होगी देश की पहली प्रदूषण मुक्त ट्रेन

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Hydrogen Train in Haryana: जींद, गोहाना और सोनीपत वालों की लॉटरी, जल्द शुरू होगी देश की पहली प्रदूषण मुक्त ट्रेन

हरियाणा के जींद में हुआ देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का फाइनल हाई-स्पीड ट्रायल

Hydrogen Train in Haryana: भारत ने हरित परिवहन (ग्रीन ट्रांसपोर्ट) की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक छलांग लगाई है। भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत देश की पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन ने शुक्रवार, 26 जून 2026 को अपना अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया।

हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल सेक्शन पर जब इस आधुनिक ट्रेन को ट्रैक पर उतारा गया, तो इसने 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़कर अधिकारियों को चौंका दिया। नीले और सफेद रंग के खूबसूरत कॉम्बिनेशन वाली यह स्वदेशी ट्रेन अब अपनी सभी तकनीकी बाधाओं को पार कर चुकी है और जल्द ही इसे आम जनता की सेवा में समर्पित कर दिया जाएगा।

जींद से सोनीपत के बीच चलेगी देश की पहली ग्रीन ट्रेन, गोहाना में भी ठहराव

रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, देश की इस पहली हाइड्रोजन ट्रेन का कमर्शियल रन हरियाणा के जींद से सोनीपत रूट के बीच शुरू होगा। इस पूरे सफर के दौरान ट्रेन गोहाना स्टेशन पर भी रुकेगी, जिससे स्थानीय दैनिक यात्रियों को एक बेहद आधुनिक और किफायती सफर का तोहफा मिलेगा।

शुक्रवार को हुए फाइनल ट्रायल के दौरान जींद रेलवे स्टेशन से जैसे ही इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, वहां मौजूद रेलकर्मी और आम लोग इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने सफर के दौरान ट्रेन के सुरक्षा मानकों, ब्रेकिंग सिस्टम और गति के तालमेल की बारीकी से जांच की।

समझिए कैसे काम करती है यह तकनीक और क्यों है पर्यावरण के लिए वरदान

इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्याधुनिक ‘हाइड्रोजन फ्यूल सेल’ तकनीक है। पारंपरिक डीजल इंजनों के उलट, इस ट्रेन में ईंधन के रूप में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा की जाती है।

इसी बिजली से ट्रेन के मोटर चलते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला धुआं या कोई भी जहरीली गैस नहीं निकलती, बल्कि उप-उत्पाद (बाय-प्रोडक्ट) के रूप में सिर्फ पानी की शुद्ध भाप उत्सर्जित होती है। दिल्ली-NCR और हरियाणा के इलाकों में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण को देखते हुए इस रूट पर ऐसी ट्रेन का चलना पर्यावरण के लिहाज से बेहद गेम-चेंजर साबित होने वाला है।

जेब पर नहीं पड़ेगा भारी बोझ, महज 5 रुपये से शुरू हो सकता है किराया

भविष्य में इस तकनीक के विस्तार से भारतीय रेलवे की डीजल पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी, जिससे रेलवे का राजस्व बचेगा और देश का कार्बन फुटप्रिंट भी घटेगा। हालांकि, रेलवे प्रशासन ने अभी तक इस ट्रेन के आधिकारिक टाइम-टेबल और किराए की अंतिम सूची जारी नहीं की है।

लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इसका शुरुआती किराया 5 रुपये से लेकर अधिकतम 25 रुपये के बीच तय किया जा सकता है। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) से अंतिम प्रशासनिक मंजूरी मिलते ही इस ट्रेन के नियमित संचालन की तारीखों का ऐलान कर दिया जाएगा।

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