जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पर्यावरण को लेकर आमजन में बढ़ी चेतना को सराहनीय बताते हुए सोमवार को कहा कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन का सख्ती से पालन किया जाना जरूरी है।
अरावली बचाओ और खेजड़ी बचाओ आंदोलन का किया ज़िक्र
गहलोत ने राजस्थान में हाल के ‘अरावली बचाओ आंदोलन’ और ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ की ओर इशारा करते हुए एक बयान में कहा कि पर्यावरण को लेकर जो चेतना आमजन में आई है, वह सराहनीय है। अब वक्त आ गया है कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन का सख्ती से पालन कराया जाए। उन्होंने कहा कि बीकानेर से ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ की जो शुरुआत हुई है, वह प्रदेश के लिए बेहद शुभ संकेत है। चाहे वह बिश्नोई समाज हो, अन्य प्रदेशवासी हों या संत समाज-सभी बधाई के पात्र हैं। बिना पर्यावरण के हम आने वाली पीढ़ियों को क्या जवाब देंगे? अमृता देवी की अगुवाई में हुए ऐतिहासिक आंदोलन को याद करते हुए गहलोत ने कहा कि उससे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ेंगे, तभी पर्यावरण बचाया जा सकेगा।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन ज्यादा जरूरी
उन्होंने कहा कि विकास अपने आप में महत्वपूर्ण है, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन अगर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन नहीं रहेगा तो स्थिति बिगड़ेगी और प्रदूषण बढ़ेगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि आज पूरे समाज में पर्यावरण की महत्ता महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने समय में ही इस समस्या को पहचान लिया था और विश्व स्तर पर पर्यावरण संरक्षण का आह्वान किया था, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।
बीकानेर में हाल में हुए ‘खेजड़ी बचाओ महापड़ाव’ का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि केवल बीकानेर में आंदोलन करने से काम नहीं चलेगा, लोगों को अपने-अपने क्षेत्रों में संगोष्ठियां और चर्चाएं आयोजित कर पर्यावरण के महत्व व प्रदूषण से निपटने के उपायों के बारे में जागरूक करना होगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाना भी जरूरी है। गहलोत ने कहा कि सरकार ने जो वादे किए हैं, उन्हें निभाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री को स्वयं हस्तक्षेप कर बातचीत करनी चाहिए, तभी कोई समाधान निकलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार ‘पेड़ संरक्षण अधिनियम’ बनाने पर भी जल्द निर्णय लेगी।