August 10, 2026

Jhajjar Kanwar Yatra: झज्जर की 12 साल की दीक्षा का अनोखा जुनून, मिनी बाइक पर सवार होकर हरिद्वार से ला रही कांवड़

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Jhajjar Kanwar Yatra: झज्जर की 12 साल की दीक्षा का अनोखा जुनून: मिनी बाइक पर सवार होकर हरिद्वार से ला रही कांवड़

झज्जर के बहु गांव की दीक्षा की अनूठी यात्रा, मिनी बाइक के पीछे शिव प्रतिमा बांध तय कर रही सफर

Jhajjar Kanwar Yatra: सावन के पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा के कई रूप देखने को मिलते हैं, लेकिन हरियाणा के झज्जर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो हर किसी को हैरत और भक्ति के अनूठे संगम से भर देती है। जिले के बहु गांव की रहने वाली महज 12 साल की दीक्षा अपनी मिनी बाइक पर सवार होकर हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गांव की ओर बढ़ रही है। सिर पर धार्मिक वेशभूषा, कानों में कुंडल और गले में माला धारण किए जब यह छोटी बच्ची बाइक दौड़ाती है, तो नेशनल हाईवे से गुजरने वाला हर शख्स ठिठककर उसे देखने लगता है।

उज्जैन महाकाल के दरबार में लिया था अनोखा संकल्प

सातवीं क्लास में पढ़ने वाली दीक्षा की इस अनूठी भक्ति के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। दीक्षा के पिता टिंकू यादव बताते हैं कि करीब एक साल पहले पूरा परिवार मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकाल मंदिर दर्शन करने गया था। वहीं दीक्षा के मन में विचार आया कि वह अगले सावन में हरिद्वार से कांवड़ लाकर अपने गांव के मंदिर में चढ़ाएगी। इस साल जब उसने परिवार के सामने अपनी यह जिद रखी, तो पहले तो सब चौंक गए, लेकिन उसकी अटूट निष्ठा को देखते हुए पिता ने उसका हौसला बढ़ाने का फैसला किया।

27 जुलाई को पहुंचीं हरिद्वार, 3 अगस्त से शुरू हुआ सफर

अपने संकल्प को अमलीजामा पहनाने के लिए दीक्षा 27 जुलाई को ही परिवार के साथ हरिद्वार पहुंच गई थी। वहां गंगा पूजन और सभी तैयारियां पूरी करने के बाद उसने 3 अगस्त की शाम करीब 4 बजे अपनी मिनी बाइक से यात्रा की शुरुआत की। बाइक के पिछले हिस्से पर भगवान शिव की सुंदर प्रतिमा और पवित्र गंगाजल की कांवड़ बांधी गई है। दीक्षा रोजाना करीब 20 किलोमीटर का सफर तय करती है। उसका लक्ष्य 11 अगस्त को अपने पैतृक गांव बहु पहुंचकर बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने का है।

सुरक्षा का पूरा पहरा, पिता बोले- बेटी में है कुछ अलग करने का जज्बा

अपनी इकलौती बेटी के इस अनोखे जुनून पर पिता टिंकू को बेहद नाज है। पेशे से किसान टिंकू खुद भी पूर्व में डाक कांवड़ ला चुके हैं। वे बताते हैं कि दीक्षा को बचपन से ही बाइक चलाने का शौक है और वह खुद को ‘मन से साध्वी और कर्म से राइडर’ मानती है। यात्रा के दौरान सुरक्षा से कोई समझौता न हो, इसके लिए पिता और चाचा अपनी स्विफ्ट कार से लगातार दीक्षा की बाइक के पीछे-पीछे चलते हैं। पिता का सपना है कि उनकी बेटी आगे चलकर देश की एक नामी प्रोफेशनल बाइक राइडर बने।

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