August 2, 2026

Kurukshetra News: 15 साल से ग्रीन बेल्ट पर चल रही थीं दुकानें, शिकायत के बाद HSVP अधिकारियों पर उठने लगे सवाल

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Kurukshetra News: 15 साल से ग्रीन बेल्ट पर चल रही थीं दुकानें, शिकायत के बाद HSVP अधिकारियों पर उठने लगे सवाल

सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर भड़की जनता

Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण इलाके न्यू सचिवालय के ठीक सामने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां सार्वजनिक पार्क और ग्रीन बेल्ट के लिए आरक्षित करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी भूमि पर पिछले करीब 15 वर्षों से अवैध कब्जा चल रहा है।

इस मामले में अब एक विस्तृत शिकायत मुख्य प्रशासक, सचिव, मुख्य सतर्कता अधिकारी (विजिलेंस), उपायुक्त और सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। शिकायत में सीधे तौर पर विभाग के स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत या घोर लापरवाही की ओर इशारा किया गया है।

टीन के खोखे और दुकानों का साम्राज्य, प्रभावित हो रहा है शहर

शिकायतकर्ता के मुताबिक, जिस जमीन को शहर के पर्यावरण और सुंदरता के लिए पार्क व ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित किया जाना था, वहां आज टीन के खोखे, अस्थायी दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का साम्राज्य खड़ा हो चुका है।

स्थानीय नागरिकों ने समय-समय पर इसकी शिकायतें प्रशासनिक स्तर पर कीं, लेकिन आज तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली। इस अतिक्रमण के कारण न सिर्फ सार्वजनिक संपत्ति का सरेआम दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि आसपास की यातायात व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है।

रडार पर आए अधिकारी, विजिलेंस जांच की उठी मांग

इस बार आर-पार के मूड में आए स्थानीय निवासियों ने मामले को ठंडे बस्ते में जाने से रोकने के लिए सीधे उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। शिकायत में मांग की गई है कि विभिन्न विभागों की एक संयुक्त टीम बनाकर मौके का मुआयना कराया जाए और वास्तविक स्थिति को रिकॉर्ड पर लाया जाए।

इसके साथ ही, पिछले डेढ़ दशक से इस अवैध कब्जे पर आंखें मूंदकर बैठे रहे जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। पूरे मामले की निष्पक्षता के लिए मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने पर जोर दिया जा रहा है।

दफ्तरों से नदारद रहते हैं साहब, न फोन उठता है न सुनवाई होती है

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा आक्रोश HSVP के अधिकारियों के अड़ियल और सुस्त रवैये को लेकर है। स्थानीय लोगों का साफ तौर पर कहना है कि विभाग के संबंधित अधिकारियों से संपर्क साधना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं है।

फरियादी जब अपनी समस्या लेकर दफ्तर पहुंचते हैं तो साहब सीट पर नहीं मिलते और फोन कॉल्स का जवाब देना तो जैसे इन अधिकारियों की डिक्शनरी में ही नहीं है। बार-बार चक्कर काटने के बाद भी जब शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं होती, तो जनता का व्यवस्था से भरोसा उठने लगता है। नागरिकों ने अब सरकार से मांग की है कि HSVP प्रशासन में अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और आम जनता के लिए उनकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि सरकारी दफ्तर सिर्फ फाइलों को दबाने का केंद्र न बने रहें।

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