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Kurukshetra News: रिश्तों की बेरुखी, “मेरे पास टाइम नहीं है”, कुरुक्षेत्र अस्पताल में भाई का शव छोड़ चली गई बहन

Kurukshetra News: रिश्तों की बेरुखी, "मेरे पास टाइम नहीं है", कुरुक्षेत्र अस्पताल में भाई का शव छोड़ चली गई बहन

रिश्तों की बेरुखी, “मेरे पास टाइम नहीं है”, कुरुक्षेत्र अस्पताल में भाई का शव छोड़ चली गई बहन

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GGaganpreet Kaur

Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) अस्पताल परिसर में मंगलवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने इंसानियत और खून के रिश्तों पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 10 वर्षों से घर-बार छोड़कर पिहोवा में रह रहे 71 वर्षीय बुजुर्ग जुगल किशोर की मौत के बाद जब उनकी इकलौती बहन पुष्पा रानी अस्पताल पहुंची, तो उम्मीद थी कि वह भाई को अंतिम विदाई देंगी। लेकिन पुष्पा के कड़वे शब्दों ने वहां मौजूद हर शख्स को हतप्रभ कर दिया।

पंजाबी में हाथ जोड़ते हुए पुष्पा ने आश्रम के सेवादारों से कहा— “संस्कार भी असी करिए, अस्थियां भी तुसी नी ले जा सकदे। हांजी, हांजी… तुसी ही कर दो संस्कार, तवाडी बौत मेहरबानी होवेगी। मेरे पास समा है नी। मैं रुक नहीं सकदी।” इतना कहकर वह अपने एक रिश्तेदार के साथ अस्पताल से रवाना हो गई।

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10 साल से पिहोवा तीर्थ में बिता रहे थे जीवन, शादी भी नहीं हुई थी

पिहोवा में नेशनल हाईवे 152D के पास स्थित बाबा फरीद अनाथ आश्रम की देखरेख करने वाले बाबा निशान सिंह ने बताया कि मूल रूप से दिल्ली के उत्तम नगर निवासी जुगल किशोर पिछले 10 सालों से पिहोवा के सरस्वती तीर्थ क्षेत्र में रह रहे थे। जुगल अविवाहित थे और परिवार के नाम पर केवल उनकी छोटी बहन पुष्पा रानी ही थीं, जिनसे वे कभी-कभार मिलने दिल्ली जाया करते थे।

करीब दो सप्ताह पहले जब जुगल की तबीयत अचानक बिगड़ी, तो अनाथ आश्रम की टीम उन्हें देखभाल के लिए अपने साथ ले आई। पिहोवा के सरकारी अस्पताल में इलाज के बाद भी जब सुधार नहीं हुआ, तो गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें कुरुक्षेत्र के LNJP अस्पताल में रेफर कर दिया गया था।

आखिरी सांस तक टालमटोल करती रही बहन, 4 सितंबर को तोड़ा दम

बाबा निशान सिंह के अनुसार, जब जुगल अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे, तब उन्होंने कई बार दिल्ली में उनकी बहन पुष्पा से संपर्क साधने की कोशिश की। हर बार बहन कोई न कोई बहाना बनाकर आने से टालमटोल करती रही। आखिरकार 4 सितंबर को इलाज के दौरान जुगल किशोर ने दम तोड़ दिया।

भाई की मृत्यु की सूचना मिलने पर पुष्पा काफी मशक्कत के बाद कुरुक्षेत्र अस्पताल पहुंची। उन्होंने स्ट्रेचर पर पड़े भाई के चेहरे को देखा जरूर, लेकिन जब अंतिम संस्कार और धार्मिक रस्मों की बात आई, तो उन्होंने बीमारी और समय की कमी का हवाला देकर अपने कदम पीछे खींच लिए।

आश्रम कमेटी ने निभाई अंतिम विदाई की जिम्मेदारी, सरस्वती में प्रवाहित कीं अस्थियां

सगी बहन द्वारा शव को इस तरह लावारिस छोड़कर चले जाने से अस्पताल में मौजूद सेवादार और आश्रम कमेटी के लोग स्तब्ध रह गए। बाबा निशान सिंह ने बताया कि बहन के रवैये से उन्हें गहरा आघात पहुंचा, लेकिन सामाजिक और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए आश्रम ने बुजुर्ग की अंत्येष्टि की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली।

आश्रम के सेवादार जुगल के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक पिहोवा ले आए, जहां पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। मंगलवार को आश्रम कमेटी के सदस्यों ने नम आंखों से जुगल की अस्थियों को एकत्र कर पिहोवा के पवित्र सरस्वती तीर्थ में विसर्जित कर दिया। इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में पारिवारिक रिश्तों के टूटते ताने-बाने को लेकर गहरा दुख और आक्रोश है।

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