AC Rules for Kids: क्या आपका बच्चा भी दिनभर रहता है एसी में? जानिए कितने तापमान पर चलाना चाहिए AC
May 23, 2026 1:26 PM
उत्तर भारत में सूरज के तीखे तेवर और 45 डिग्री के पार जाते पारे के बीच हर घर में एसी दिन-रात दौड़ रहे हैं। खासकर छोटे बच्चों को पसीने और घमौरियों से बचाने के लिए माता-पिता उन्हें लगातार ठंडे कमरों में ही कैद रखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस ठंडी हवा को आप अपने लाडले के लिए सुरक्षा कवच समझ रहे हैं, वह धीरे-धीरे उसकी सेहत की सबसे बड़ी दुश्मन बनती जा रही है? पीडियाट्रिशियन (शिशु रोग विशेषज्ञों) का साफ कहना है कि बच्चों के शरीर का थर्मोरेगुलेशन सिस्टम (तापमान नियंत्रित करने की क्षमता) बड़ों की तुलना में काफी नाजुक होता है। ऐसे में बिना सोचे-समझे एसी का अंधाधुंध इस्तेमाल बच्चों को गंभीर रूप से बीमार कर रहा है।
अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता कमरे को कड़कड़ाती ठंडक देने के लिए रिमोट का तापमान 18 या 20 डिग्री पर सेट कर देते हैं। डॉक्टरों की मानें तो यह आदत बच्चों के फेफड़ों और स्किन के लिए किसी झटके से कम नहीं है। बच्चों के कमरे का आदर्श तापमान हमेशा 24 से 26 डिग्री सेल्सियस ही होना चाहिए, ताकि उनके शरीर का संतुलन न बिगड़े।
स्किन का रूखापन और सांस की तकलीफ; एसी की 'ड्राई एयर' का खतरनाक साइड इफेक्ट
लगातार बंद कमरे में चलने वाला एसी हवा में मौजूद सारी नमी (Moisture) को सोख लेता है। यह सूखी हवा जब घंटों तक बच्चे के संपर्क में रहती है, तो उसकी कोमल त्वचा रूखी और बेजान होने लगती है। इतना ही नहीं, यह ड्राई एयर बच्चों के नथुने और श्वास नली की अंदरूनी झिल्ली को भी सुखा देती है। नतीजा यह होता है कि बच्चों को बार-बार गले में खराश, सूखी खांसी, नाक बंद होना या एलर्जी की शिकायत होने लगती है।
जो बच्चे पहले से ही अस्थमा या ब्रोंकाइटिस जैसी दिक्कतों से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह सूखी और ठंडी हवा सांस लेने में तकलीफ को कई गुना बढ़ा देती है। इसके अलावा, लगातार एसी में रहने वाले बच्चों के शरीर की नेचुरल इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) भी प्रभावित होती है, जिससे वे मौसम के मामूली बदलाव को भी बर्दाश्त नहीं कर पाते।
नवजात शिशुओं को सीधे झोंके से बचाएं; तापमान का 'थर्मल शॉक' है सबसे बड़ा विलेन
अगर आपके घर में नवजात शिशु या कुछ ही महीनों का बच्चा है, तो आपको दोगुना सतर्क रहने की जरूरत है। नवजात बच्चों को कभी भी सीधे एसी के ब्लोअर (हवा के झोंके) के सामने नहीं सुलाना चाहिए। एसी की सीधी और तेज हवा उनके शरीर के तापमान को अचानक गिरा सकती है, जिससे उन्हें 'हाइपोथर्मिया' जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। बच्चों को हमेशा सूती (कॉटन) के हल्के कपड़े पहनाकर रखें और जरूरत के मुताबिक उनके हाथ-पैर ढक कर रखें।
एक और बड़ी गलती जो अक्सर पैरेंट्स करते हैं, वह है 'थर्मल शॉक'। बच्चे को सीधे 22 डिग्री के ठंडे कमरे से निकाल कर बिना नॉर्मल किए अचानक 42 डिग्री की तेज धूप या गर्म लॉबी में ले जाना बेहद खतरनाक है। तापमान का यह अचानक होने वाला उतार-चढ़ाव बच्चों को तुरंत सर्दी-जुकाम और बुखार की चपेट में ले आता है।
इन जरूरी बातों को गांठ बांध लें माता-पिता
अपने बच्चों को ठंडी हवा का आनंद भी देने और उन्हें बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टरों ने कुछ बेहद जरूरी गाइडलाइंस सुझाई हैं: फिल्टर की सफाई: हर हफ्ते एसी के फिल्टर को अच्छी तरह साफ करें। गंदे फिल्टर में जमा धूल-मिट्टी और बैक्टीरिया हवा के जरिए बच्चे के फेफड़ों में पहुंचकर इन्फेक्शन फैलाते हैं। हवा का वेंटिलेशन: चौबीस घंटे कमरा लॉक न रखें। दिन में कम से कम दो बार एक-एक घंटे के लिए एसी बंद करें और खिड़की-दरवाजे खोल दें ताकि कमरे की दूषित हवा बाहर निकल सके और ऑक्सीजन का फ्लो बेहतर हो।
पानी की कमी न होने दें: एसी रूम में बच्चों को प्यास का अहसास कम होता है, जबकि उनके शरीर से नमी लगातार छिन रही होती है। इसलिए उन्हें थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, नींबू पानी या ओआरएस का घोल देते रहें।
याद रखिए, भीषण गर्मी से मासूमों का बचाव बेहद जरूरी है, लेकिन उनकी सेहत उससे भी कहीं ज्यादा कीमती है। एसी का इस्तेमाल सिर्फ दोपहर की तपिश या रात की सुकून भरी नींद के लिए करें, इसे बच्चों की 24 घंटे की आदत न बनने दें।