घर बनवाते समय चुनें ये खास ईंटें, कड़कड़ाती गर्मी में भी अंदर से ठंडा रहेगा मकान
May 28, 2026 4:10 PM
गर्मियों के मौसम में घरों का भट्टी की तरह तपना एक आम समस्या है, जिससे राहत पाने के लिए लोग भारी-भरकम बिजली बिल चुकाकर एसी-कूलर चलाते हैं। निर्माण विशेषज्ञों के अनुसार, घर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने की नींव उसकी दीवारों यानी सही ईंटों के चुनाव से शुरू होती है। आज के समय में थर्मल इंसुलेशन तकनीक वाली ईंटें बाहर की लू और तपिश को कमरों के भीतर आने से रोक सकती हैं।
उत्तर भारत में जैसे-जैसे पारा 45 डिग्री के पार जाने लगा है, वैसे-वैसे कंक्रीट के जंगल बन चुके शहरों में मकान दिन-रात तपने लगे हैं। दोपहर के समय सूरज की सीधी किरणें जब छतों और दीवारों पर पड़ती हैं, तो अंदर का तापमान असहनीय हो जाता है। अक्सर लोग घर बनवाते समय केवल सरिया और सीमेंट की मजबूती पर ध्यान देते हैं, लेकिन दीवारों के लिए इस्तेमाल होने वाली ईंटों की तासीर को नजरअंदाज कर देते हैं। आर्किटेक्ट्स और सिविल इंजीनियरों का मानना है कि ईंटों का गलत चुनाव आपके घर को 'हीट ट्रैप' (गर्मी का जाल) बना सकता है। अगर कंस्ट्रक्शन के वक्त ही सही मटीरियल चुन लिया जाए, तो न सिर्फ घर अंदर से ठंडा रहेगा बल्कि एयर कंडीशनर का खर्च भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
फ्लाई ऐश ब्रिक्स: बजट में फिट और गर्मी से राहत
आजकल बाजारों में थर्मल एफिशिएंसी को ध्यान में रखकर कई तरह के विकल्प मौजूद हैं। इनमें 'फ्लाई ऐश' यानी थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली कोयले की राख से बनी ईंटें काफी लोकप्रिय हो रही हैं। इन ईंटों की बनावट ऐसी होती है कि ये पारंपरिक लाल ईंटों की तुलना में बेहद कम गर्मी सोखती हैं। कम ऊष्मा सोखने के कारण ये दोपहर की तेज धूप का असर मकान के भीतर नहीं जाने देतीं, जिससे कमरे का तापमान संतुलित बना रहता है। इसके साथ ही इनका आकार बिल्कुल एक समान होता है, जिससे दीवार बनाते समय प्लास्टर और सीमेंट की भी बचत होती है।
क्या हैं AAC ब्लॉक्स और क्यों बढ़ रही है इनकी डिमांड?
आधुनिक बहुमंजिला इमारतों और कोठियों में इन दिनों AAC (Autoclaved Aerated Concrete) ब्लॉक्स का चलन तेजी से बढ़ा है। यह हल्के कंक्रीट से बने बड़े साइज के ब्लॉक होते हैं, जिनके भीतर हवा के छोटे-छोटे पॉकेट्स होते हैं। विज्ञान के नियम के अनुसार, हवा ऊष्मा की कुचालक होती है, इसलिए ये ब्लॉक बाहर की भयंकर गर्मी को दीवार के पार जाने ही नहीं देते। इसे 'थर्मल इंसुलेशन' कहा जाता है। हालांकि ये ब्लॉक पारंपरिक ईंटों से थोड़े महंगे जरूर पड़ते हैं, लेकिन गर्मियों में एसी के कम इस्तेमाल और सर्दियों में कमरों को गर्म रखने की क्षमता के कारण लंबे समय में यह सौदा बेहद किफायती साबित होता है।
मिट्टी की पारंपरिक लाल ईंटों का पुराना जादू
अगर आपका झुकाव पूरी तरह प्राकृतिक और पारंपरिक निर्माण की तरफ है, तो अच्छी क्वालिटी की मिट्टी की लाल ईंटें भी एक बेहतरीन विकल्प हैं। हमारे गांवों के पुराने मकानों में इसी वजह से गर्मियों में भी ठंडक का अहसास होता था। बशर्ते, ईंटें अच्छी तरह पकी हुई (अव्वल दर्जे की) हों और उनकी मोटाई सही रखी जाए। नौ इंच या उससे मोटी दीवारें गर्मी को अंदर पहुंचने में एक लंबा बैरियर देती हैं, जिससे सूरज ढलने तक दीवार के अंदरूनी हिस्से ठंडे बने रहते हैं।
सिर्फ ईंट ही नहीं, कोटिंग भी है जरूरी
मकान को पूरी तरह 'हीट प्रूफ' बनाने के लिए केवल ईंटों पर निर्भर रहना काफी नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि दीवार की बाहरी सतह पर किए जाने वाले प्लास्टर और पेंट का रंग भी उतना ही मायने रखता है। घर के बाहरी हिस्सों पर हमेशा हल्के रंग या रिफ्लेक्टिव व्हाइट पेंट का इस्तेमाल करना चाहिए, जो सूरज की रोशनी को सोखने के बजाय वापस परावर्तित (रिफ्लेक्ट) कर देते हैं। घर बनाते समय अपनी जेब, स्थानीय मौसम और भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखकर ही सामग्री का चयन करें ताकि आने वाले सालों में जून-जुलाई की गर्मी आपके आशियाने को परेशान न कर सके।