Gen Z Love: रिश्तों पर इम्तियाज अली का बड़ा बयान: बोले- आज की पीढ़ी प्यार के मामले में ज्यादा ईमानदार है
Jun 11, 2026 1:49 PM
लाइफस्टाइल। 'जबर वी मेट', 'रॉकस्टार' और 'तमाशा' जैसी फिल्मों से परदे पर मोहब्बत की नई परिभाषा गढ़ने वाले निर्देशक इम्तियाज अली का मानना है कि इश्क असल में खुद को तलाशने का एक खूबसूरत जरिया है। हाल ही में उन्होंने आज के दौर की युवा पीढ़ी, जिसे 'जेन जेड' कहा जाता है, के रिश्तों और उनके प्रेम चक्र को लेकर कुछ बेहद दिलचस्प बातें साझा की हैं। इम्तियाज का कहना है कि आज का युवा वर्ग रिश्तों के मामले में पिछली पीढ़ियों की तुलना में कहीं ज्यादा साफगोई पसंद और ईमानदार है। वे समाज के डर से अपनी भावनाओं को दबाते नहीं, बल्कि जो महसूस करते हैं, उसे पूरी शिद्दत और बेबाकी से स्वीकार करते हैं।
आकर्षण से शुरू होकर रूहानी जुड़ाव तक पहुंचता है सफर
इम्तियाज अली ने आज के प्रेम संबंधों की परतों को खोलते हुए कहा कि शुरुआत में युवा किसी के लुक्स, उसकी पर्सनैलिटी या फिर लाइफस्टाइल को देखकर आकर्षित जरूर होते हैं। डेटिंग का शुरुआती दौर इसी बाहरी चकाचौंध के इर्द-गिर्द घूमता है। लेकिन जैसे-जैसे वक्त गुजरता है, उन्हें इस बात का इल्म होने लगता है कि टिकने वाला प्यार बाहरी आवरण में नहीं, बल्कि इंसान के भीतर छिपे ठहराव, आपसी समझ और रूहानी अपनेपन में होता है। यही वो तजुर्बा है जो आज की पीढ़ी को कम उम्र में ही रिश्तों की गहराई को समझने का सलीका सिखा रहा है।
तकनीक बदली पर नहीं बदली दिल की चाहत, दिखावे से परहेज
आज का दौर सोशल मीडिया, वर्चुअल चैट्स और डेटिंग ऐप्स का है, जिसने लोगों को आपस में जोड़ने के अनगिनत रास्ते दे दिए हैं। इसके बावजूद इम्तियाज अली का मानना है कि इंसानी दिल की मूल चाहत सदियों पुरानी ही है। हर किसी को एक अदद ऐसे साथी की तलाश है जो उसे बिना किसी शर्त के स्वीकार करे, उसकी बात सुने और जिससे एक सच्चा जुड़ाव महसूस हो सके। गैजेट्स और प्लेटफॉर्म्स बदल सकते हैं, मगर मोहब्बत की बुनियादी जरूरत आज भी वही है। नई पीढ़ी हमें सिखाती है कि किसी रिश्ते में महज लोक-लाज या परिवार के दबाव में घिसटने से बेहतर है कि अपनी सीमाओं और उम्मीदों को लेकर पार्टनर के सामने बिल्कुल शीशे की तरह साफ रहा जाए।
मुकम्मल साथी की चाहत बनाम असलियत की स्वीकार्यता
निर्देशक के मुताबिक, अक्सर लोग अपने जेहन में एक 'परफेक्ट पार्टनर' का खाका तैयार कर लेते हैं और ताउम्र उसी काल्पनिक चेहरे के पीछे भागते रहते हैं। जबकि हकीकत यह है कि असली और मुकम्मल प्यार तब मिलता है जब आप सामने वाले को उसकी तमाम कमियों और खूबियों के साथ अपना लेते हैं। रिश्ते महज तात्कालिक आकर्षण के बूते नहीं, बल्कि आपसी सब्र, गहरे भरोसे और सम्मान से परवान चढ़ते हैं। कुल मिलाकर, इम्तियाज अली की नजर में आज की पीढ़ी भले ही प्यार को अपने नए तौर-तरीकों से जी रही हो, वे सवाल करते हों और जल्दी फैसले लेते हों, लेकिन उनकी अंतिम मंजिल भी वही है जो हर दौर के आशिक की रही है—एक ऐसा मजबूत रिश्ता जो दिखावे के खोखलेपन पर नहीं, बल्कि जज्बातों की मजबूत बुनियाद पर टिका हो।