दूध की थैली के रंगों का सीक्रेट: जानिए नीले, हरे और ऑरेंज पैकेट का असली मतलब
Jun 01, 2026 1:53 PM
सुबह-सुबह जब हम दूध की थैली लेने बूथ पर जाते हैं, तो क्रेड में रखे नीले, हरे और नारंगी पैकेट हमारी नजरों के सामने से गुजरते हैं। हममें से अधिकांश लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे अपनी बंधी-बंधाई पसंद का पैकेट उठाकर घर चल देते हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि यह अलग-अलग रंग सिर्फ कंपनियों की मार्केटिंग रणनीति या सजावट का हिस्सा हैं। लेकिन खान-पान के इस रोजमर्रा के विज्ञान के पीछे एक बेहद जरूरी गणित छिपा है। दरअसल, पैकेटों के ये रंग चिल्ला-चिल्लाकर बताते हैं कि उस प्लास्टिक की थैली के भीतर बंद सफेद गाढ़े लिक्विड का मिजाज कैसा है, उसमें फैट की मात्रा कितनी है और वह आपकी सेहत के लिए कितना मुफीद है।
हरे रंग का पैकेट: सेहत और स्वाद का संतुलन
डेयरी सेक्टर में अमूमन हरे रंग का पैकेट 'टोंड मिल्क' (Toned Milk) के लिए रिजर्व माना जाता है। इस दूध की खासियत यह है कि इसमें से अतिरिक्त मलाई (फैट) को एक तय प्रक्रिया के तहत निकाल लिया जाता है, लेकिन इसके जरूरी विटामिन्स और कैल्शियम से कोई समझौता नहीं होता। साधारण शब्दों में कहें, तो यह उन लोगों की पहली पसंद होना चाहिए जो न तो बहुत भारी या मलाईदार दूध पीना चाहते हैं और न ही बिल्कुल पानी जैसा पतला। रोजमर्रा की चाय, कॉफी या सामान्य तौर पर सीधे पीने के लिए इसे सबसे संतुलित और बजट-फ्रेंडली विकल्प माना जाता है।
नीले रंग का पैकेट: कैलोरी पर सख्त पहरा
अगर आप वजन कम करने की जद्दोजहद में जुटे हैं या दिल की सेहत को लेकर फिक्रमंद हैं, तो नीले रंग का पैकेट आपके लिए ही बना है। आमतौर पर यह रंग 'डबल टोंड मिल्क' (Double Toned Milk) का संकेत होता है। इस दूध को दो बार टोनिंग प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिससे इसमें फैट का प्रतिशत घटकर नाममात्र का रह जाता है। यह दूध बनावट में काफी हल्का और पतला होता है। हालांकि, फिटनेस के दीवानों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि यह बिना अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाए शरीर को जरूरी प्रोटीन और पोषण आसानी से दे देता है।
नारंगी या पीला पैकेट: बच्चों और स्वाद के शौकीनों की पसंद
क्रीमी, गाढ़ी और मलाईदार चाय की चाहत रखने वाले लोग हमेशा काउंटर से नारंगी या गहरे पीले रंग का पैकेट ही मांगते हैं। यह पैकेट 'फुल क्रीम मिल्क' (Full Cream Milk) की प्रामाणिक पहचान है। इसमें भैंस के दूध की तरह फैट की मात्रा सबसे ज्यादा (करीब 6 प्रतिशत या उससे अधिक) होती है। चूंकि यह काफी भारी और ऊर्जा से भरपूर होता है, इसलिए यह बढ़ते बच्चों, खिलाड़ियों या शारीरिक श्रम करने वाले युवाओं की डाइट के लिए एकदम मुफीद माना जाता है। खोया, पनीर या घर में गाढ़ी खीर बनानी हो, तो शेफ इसी पैकेट पर भरोसा जताते हैं।
आंख मूंदकर न करें भरोसा, पैकेट की बारीक लिखावट भी पढ़ें
मशहूर डेयरी एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालांकि अमूल, मदर डेयरी जैसी बड़ी कंपनियां इसी स्थापित कलर कोड का पालन करती हैं, लेकिन इसे कोई कानूनी बाध्यता नहीं माना जा सकता। कई बार कुछ रीजनल या नए ब्रांड अपनी ब्रांडिंग के हिसाब से रंगों को बदल भी देते हैं। इसलिए समझदारी इसी में है कि सिर्फ पैकेट का रंग देखकर दूध न खरीदें। पैकेट के पीछे छपे छोटे अक्षरों को पढ़ने की आदत डालें, जहां 'फैट' और 'एसएनएफ' (सॉलिड नॉट फैट) का साफ प्रतिशत लिखा होता है। साथ ही, दूध पॉश्चुराइज्ड है या होमोजिनाइज्ड, और उसकी 'यूज़ बाई' (इस्तेमाल की अंतिम तिथि) क्या है, यह देखना कभी न भूलें।