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क्या आपसे भी हुई है कोई बड़ी भूल? जानिए क्यों उसे सुधारने में कभी देर नहीं होती

Jun 16, 2026 10:41 AM

जिंदगी के सफर में हम सब कभी न कभी, किसी न किसी मोड़ पर चूक जाते हैं। कभी फैसलों में जल्दबाजी, तो कभी परिस्थितियों का गलत आकलन हमसे ऐसी भूल करवा देता है, जिसका मलाल लंबे समय तक सालता रहता है। आज का विचार इसी इंसानी फितरत और उससे उबरने के जज्बे को बयां करता है:

"भूल करने के लिए कोई भी समय अच्छा नहीं होता, और भूल सुधारने के लिए कोई भी समय बुरा नहीं होता।"

भूल से भारी है उसे ढोते रहने का बोझ

देखा जाए तो गलतियां करना इंसान का बुनियादी स्वभाव है। कोई भी शख्स जानबूझकर अपने लिए गड्ढा नहीं खोदता, लेकिन वक्त का फेर और नासमझी इंसान को गलत राह पर ले ही जाती है। अमूमन लोग एक बार गलती होने के बाद उसी के शोक में डूबे रहते हैं। वे मान लेते हैं कि अब सब कुछ खत्म हो चुका है और सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची।

वरिष्ठ विचारकों का मानना है कि भूल हो जाना उतनी बड़ी समस्या नहीं है, जितनी बड़ी समस्या उसे सही साबित करने की जिद या उसे जिंदगी भर ढोते रहना है। समय कभी यह देखकर नहीं आता कि अब आपसे गलती होने वाली है। इसलिए, भूल करने का कोई 'मुहूर्त' या सही वक्त नहीं होता; वह बस हो जाती है।

हौसले की दहलीज: जब जागो, तभी सवेरा

इस सुविचार का सबसे खूबसूरत और व्यावहारिक पहलू इसका दूसरा हिस्सा है। यह हमें यह सिखाता है कि अतीत के पिंजरे से बाहर निकलने का रास्ता हमेशा खुला रहता है। अगर आपको आज अहसास हुआ है कि बीते कल में आपसे कोई बड़ी खता हुई थी, तो आज का दिन, अभी का यह पल ही उस गलती को सुधारने के लिए सबसे मुफीब (बेहतर) वक्त है।

अक्सर लोग समाज के डर से या 'अब तो बहुत देर हो चुकी है' यह सोचकर अपनी गलतियों को सुधारने से कतराते हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि जिन्होंने अपनी भूल को स्वीकार किया और उसे सुधारने के लिए पहला कदम उठाया, इतिहास ने उनका स्वागत किया। भूल सुधारने के लिए उम्र का कोई पड़ाव, घड़ी का कोई कांटा या समाज की कोई बंदिश आड़े नहीं आनी चाहिए। जब हौसला जाग जाए, सुधार की वही घड़ी सबसे शुभ बन जाती है।

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