नई दिल्ली: केंद्र सरकार के ताजा बजट में इनकम टैक्स स्लैब या रेट्स को लेकर कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है। यानी आम करदाताओं को सीधे टैक्स कम होने की राहत नहीं मिली। हालांकि, टैक्स से जुड़े कुछ प्रक्रियात्मक बदलाव और कुछ खास क्षेत्रों में संशोधन जरूर किए गए हैं, जिनका असर निवेशकों, ट्रेडर्स और विदेश पैसे भेजने वालों पर पड़ेगा।



टैक्स को लेकर हुए बदलाव 

1. 1 अप्रैल से नया इनकम टैक्स कानून

 केंद्र सरकार ने पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 को बदलकर नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लाया जाएगा। ये 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसमें टैक्स रेट्स या स्लैब में कोई बदलाव नहीं है, इसके जरिए सिर्फ टैक्स रिटर्न फाइल करने करने की प्रोसेस आसान बनाई जाएगी।


2. विदेश रुपए भेजने पर कम टैक्स

पढ़ाई और इलाज के लिए विदेश पैसे भेजने पर अब कम टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) लगेगा। सरकार ने इसे 5% से घटाकर 2% करने का फैसला किया है। विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाले 5% और 20% के TCS रेट को घटाकर 2% किया गया है।


3. TDS न कटवाने के लिए एप्लिकेशन की जरूरत नहीं 

टैक्स डिडक्शन एट सोर्स नहीं कटवाने के लिए अलग से एप्लिकेशन देने की जरूरत नहीं होगी। नियमों अनुसार अब अगर आप पर इनकम टैक्स नहीं बनता है तो आपका TDS नहीं काटा जाएगा। अभी इसके लिए फॉर्म 15G (60 साल से कम वालों के लिए) या फॉर्म 15H (वरिष्ठ नागरिकों के लिए) जमा करना होता था।


4. 31 मार्च तक फाइल कर सकेंगे रिवाइज्ड रिटर्न

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में सुधार करने की आखिरी तारीख बढ़ा दी गई है। अब मामूली फीस देकर 31 दिसंबर की जगह 31 मार्च तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल किया जा सकेगा।


5. फ्यूचर-ऑप्शंस ट्रेडिंग करना महंगा

सरकार ने फ्यूचर ट्रेडिंग पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया है। ऑप्शंस पर भी STT को बढ़ाकर 0.15% किया गया है। इसे ट्रेडिंग करना महंगा हो जाएगा।


6. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स लगेगा

अब सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर कैपिटल गेन टैक्स की छूट नहीं मिलेगी। इसका मतलब केवल उन्हीं निवेशको टैक्स‑फ्री होने का फायदा मिलेगा जिन्होंने RBI से बॉन्ड खरीदे और उसे पूरी अवधि तक रखा। पहले SGB पर ब्याज के अलावा जो भी फायदा निवेशकों को होता था, वह मैच्योरिटी (8 साल) पर टैक्स‑फ्री होता था, चाहे उन्होंने बॉन्ड को RBI से खरीदा हो या बाद में सेकेंडरी बाजार (स्टॉक एक्सचेंज) से लिए हों।


7. टैक्स रिजीम में कोई बदलाव नहीं

पुरानी टैक्स रिजीम चुनने पर अभी भी आपकी 2.5 लाख रुपए तक की इनकम ही टैक्स फ्री रहेगी। हालांकि, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87A के तहत आप 5 लाख तक की इनकम पर टैक्स बचा सकते हैं। वहीं न्यू टैक्स रिजीम चुनने पर पहले की तरह ही 4 लाख रुपए तक की इनकम पर टैक्स नहीं देना होगा। इसमें इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87A के तहत सैलरीड पर्सन 12.75 लाख रुपए तक की इनकम पर और अन्य 12 लाख तक की इनकम पर टैक्स छूट पा सकते हैं।


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