August 3, 2026

Neeraj Chopra: नीरज चोपड़ा ने ग्लासगो में जीता सिल्वर मेडल, 85.83 मीटर दूर फेंका भाला

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Neeraj Chopra: नीरज चोपड़ा ने ग्लासगो में जीता सिल्वर मेडल, 85.83 मीटर दूर फेंका भाला

नीरज चोपड़ा ने ग्लासगो में जीता सिल्वर मेडल, 85.83 मीटर दूर फेंका भाला

Neeraj Chopra: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के पुरुषों के जैवलिन थ्रो इवेंट में भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर तिरंगा लहराया है। हालांकि इस बार गोल्ड मेडल उनके हाथ से थोड़ा दूर रह गया और उन्हें सिल्वर से संतोष करना पड़ा।

नीरज ने अपने दूसरे प्रयास में 85.83 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंककर मेडल तालिका में दूसरा स्थान हासिल किया। इस कड़े मुकाबले में श्रीलंका के रुमेश पथिराजे ने 89.75 मीटर के बड़े थ्रो के साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। वहीं, पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम शुरुआती तीन प्रयासों के बाद ही रेस से बाहर हो गए।

खंडरा में जश्न, पिता बोले- “हवा और ठंड ने बिगाड़ा खेल”

जैसे ही ग्लासगो से नीरज के सिल्वर मेडल जीतने की खबर आई, पानीपत स्थित उनके पैतृक गांव खंडरा में खुशियां छा गईं। परिजनों और ग्रामीणों ने तालियां बजाकर नीरज के इस शानदार प्रदर्शन की सराहना की।

फोन पर हुई खास बातचीत में नीरज के पिता सतीश चोपड़ा ने कहा कि बेटे का देश के लिए मेडल जीतना बेहद गर्व की बात है, हालांकि उम्मीद गोल्ड की थी। उन्होंने बताया कि ग्लासगो में तेज हवाओं और ठंडे मौसम के कारण खिलाड़ियों को अपनी लय पकड़ने में दिक्कत आई। इसके अलावा बीते दिनों नीरज को लगी चोट का असर भी मैदान पर नजर आया।

उतार-चढ़ाव से भरा रहा फाइनल मुकाबला

फाइनल इवेंट में नीरज चोपड़ा का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। उन्होंने अपने पहले प्रयास में 80.97 मीटर दूर भाला फेंका। दूसरे प्रयास में उन्होंने अपना बेस्ट 85.83 मीटर का थ्रो किया, जिसने उनका मेडल पक्का कर दिया।

इसके बाद तीसरे प्रयास में 81.29 मीटर और चौथे प्रयास में 80.73 मीटर की दूरी तय हुई। अपने थ्रो की दूरी से असंतुष्ट नीरज ने पांचवें और छठे प्रयास को खुद ही फाउल कर दिया। अंततः दूसरे थ्रो के आधार पर उन्हें रजत पदक मिला।

भिवानी के लाल यशवीर सिंह का कांस्य पर कब्जा

इस मुकाबले में भारत के लिए दूसरी सबसे बड़ी खुशी हरियाणा के भिवानी जिले से आई। देवसर गांव के यशवीर सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। मिनी क्यूबा कहे जाने वाले भिवानी में जन्मे यशवीर का पूरा परिवार एथलेटिक्स पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है।

यशवीर के पिता राय सिंह खुद नेशनल लेवल के जैवलिन थ्रोअर और रेलवे के रिटायर्ड कोच रहे हैं। पॉडियम पर दो भारतीय खिलाड़ियों का एक साथ खड़ा होना पूरे देश के लिए ऐतिहासिक पल बन गया।

“ठंड में थ्रो खींचना थोड़ा मुश्किल, पर वापसी अच्छी रही”: नीरज चोपड़ा

मुकाबले के बाद बातचीत करते हुए नीरज चोपड़ा ने माना कि वेदर कंडीशंस और हालिया इंजरी का असर खेल पर पड़ा। नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा कि भारतीय खून होने के नाते उन्हें गर्मी में खेलना ज्यादा पसंद है और अत्यधिक ठंड में थ्रो में वह खिंचाव नहीं मिल पाता।

नीरज ने अपने साथी यशवीर की तारीफ करते हुए कहा कि सीजन का पर्सनल बेस्ट देकर ब्रॉन्ज जीतना बहुत बड़ी बात है। अपनी फिटनेस पर बात करते हुए नीरज ने कहा कि वह धीरे-धीरे अपनी पुरानी रिदम हासिल कर रहे हैं और आने वाली डायमंड लीग प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे।

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