September 15, 2026

Jodhpur News: जोधपुर में सिजेरियन के बाद 8 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, 2 आईसीयू में भर्ती, डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल का OT बंद

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Jodhpur News: जोधपुर के पावटा स्थित डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में 20 जून को हुई 8 सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। महिलाओं में ब्लीडिंग, ब्लड प्रेशर कम होने और संक्रमण जैसे लक्षण पाए गए। इनमें से दो महिलाओं की हालत अधिक गंभीर होने पर उन्हें मथुरा दास माथुर (एमडीएम) हॉस्पिटल रेफर किया गया। बाद में एक महिला को और गंभीर स्थिति के चलते एम्स जोधपुर भेजा गया, जहां उसका आईसीयू में इलाज चल रहा है। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने ऑपरेशन थिएटर बंद कर दिया है और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल प्रशासन ने ऑपरेशन थिएटर से नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं। रिपोर्ट आने तक यहां किसी भी प्रकार की सर्जरी नहीं की जाएगी। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सिजेरियन प्रक्रिया के दौरान उपयोग की गई दवाओं पर भी एहतियातन रोक लगा दी गई है। हॉस्पिटल के पीएमओ डॉ. कुलबीर चोपड़ा के अनुसार राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित की है। समिति में डॉक्टरों, ड्रग इंस्पेक्टरों और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जो सभी सैंपल और चिकित्सा प्रक्रियाओं की जांच कर रहे हैं।

छह प्रसूताओं की हालत स्थिर

डॉ. कुलबीर चोपड़ा ने बताया कि 20 जून को कुल आठ सिजेरियन ऑपरेशन किए गए थे। इनमें से दो महिलाओं को गंभीर स्थिति के कारण रेफर करना पड़ा, जबकि बाकी छह महिलाओं को डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में ही निगरानी में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इन छह प्रसूताओं की स्थिति अब सामान्य है और लगातार चिकित्सकीय निगरानी की जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार किसी भी मरीज की हालत फिलहाल चिंताजनक नहीं है।

दो महिलाओं का आईसीयू में इलाज

मथानिया निवासी ललिता को जोधपुर एम्स के आईसीयू में भर्ती किया गया है। वह पहले से मधुमेह की मरीज हैं और उनका ब्लड प्रेशर लगातार कम हो रहा था। इसी वजह से उन्हें एमडीएम हॉस्पिटल से एम्स रेफर किया गया। दूसरी ओर दईजर निवासी सोनू का इलाज एमडीएम हॉस्पिटल के आईसीयू में चल रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन को भी मरीजों की स्थिति से नियमित रूप से अवगत कराया जा रहा है।

डॉक्टरों ने बताई स्वास्थ्य बिगड़ने की वजह

एमडीएम हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने बताया कि दोनों गंभीर मरीजों को किडनी संक्रमण और अन्य जटिलताओं के कारण भर्ती किया गया था। ललिता को पहले से शुगर की समस्या थी और उनका रक्तचाप भी लगातार गिर रहा था। एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा ने बताया कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं में संक्रमण के लक्षण दिखाई दिए। दो महिलाओं में किडनी संक्रमण अधिक था, जबकि अन्य मरीजों में सेप्टीसीमिया यानी खून में संक्रमण की स्थिति सामने आई।

डॉ. बीएस जोधा के अनुसार एक प्रसूता को अत्यधिक रक्तस्राव हुआ था, जबकि दूसरी महिला डायबिटीज, खून की कमी और लो ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं से जूझ रही थी। ऐसे मामलों में किडनी पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। चिकित्सकों का कहना है कि सभी मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री और उपचार प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है ताकि स्वास्थ्य बिगड़ने के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

मरीजों के परिजनों ने बताई स्थिति

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में भर्ती तस्लीम बानो, संतोष और गट्टू कंवर की स्थिति में अब सुधार बताया जा रहा है। इन महिलाओं को 19 जून को भर्ती किया गया था और 20 जून को उनकी डिलीवरी हुई थी। संतोष के पति धनराज ने बताया कि डिलीवरी के बाद कुछ मरीजों को पेशाब संबंधी दिक्कतें हुई थीं, लेकिन उनकी पत्नी अब पूरी तरह ठीक हैं। वहीं तस्लीम बानो के रिश्तेदार इस्लामुद्दीन ने बताया कि डिलीवरी के बाद रक्तस्राव और सांस लेने में दिक्कत हुई थी, हालांकि अब हालत पहले से बेहतर है।

गट्टू कंवर के परिजन विजेंद्र सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सफल रहा था और मरीज को रक्त भी चढ़ाया गया है। परिवार को उम्मीद है कि भविष्य में किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या नहीं होगी। राजस्थान में हाल के दिनों में सिजेरियन डिलीवरी के बाद स्वास्थ्य जटिलताओं के कई मामले सामने आए हैं। इससे पहले कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और जेके लोन हॉस्पिटल में पांच प्रसूताओं की किडनी फेल होने से मौत हुई थी, जबकि बीकानेर के पीबीएम हॉस्पिटल में छह महिलाओं की किडनी फेल होने के मामलों में दो प्रसूताओं की मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में जोधपुर की घटना ने स्वास्थ्य विभाग की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

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