Pehowa Paddy Scam: 9 करोड़ के धान घोटाले पर पिहोवा में भड़के किसान, मंत्री राजेश नागर से तीखी बहस
केवल सस्पेंशन क्यों, FIR कब? पिहोवा में किसानों ने मंत्री राजेश नागर को घेरा
Pehowa Paddy Scam: पिहोवा (अभिषेक पूर्णिमा): कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा में करोड़ों रुपये के कथित धान घोटाले को लेकर किसानों और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के बीच तनातनी गहराती जा रही है। केवल विभागीय अधिकारियों के निलंबन तक कार्रवाई सीमित रहने से भड़के भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के कार्यकर्ताओं ने देर रात पिहोवा पहुंचे खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्यमंत्री राजेश नागर का घेराव किया। प्रिंस वड़ैच की अगुवाई में किसानों ने मंत्री से सीधा सवाल दागा कि भ्रष्टाचार सिद्ध होने के बावजूद दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने का वादा अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ?
बता दें कि मंत्री राजेश नागर पिहोवा अनाज मंडी परिसर में आयोजित महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज के दिव्य गीता सत्संग में शामिल होने आए थे। जैसे ही वे कार्यक्रम के बाद वापस लौटने लगे, तभी किसानों के एक बड़े जत्थे ने उन्हें रोक लिया और घोटाले से जुड़े सारे तथ्य उनके सामने रख दिए।
सस्पेंशन तो हुआ, पर एफआईआर से बच रहे भ्रष्टाचारी
किसानों ने मंत्री को याद दिलाया कि पिहोवा की एक राइस मिल में हुई जांच के दौरान करीब 9 करोड़ रुपये मूल्य का सरकारी धान गायब मिला था। इस मामले में डीएफएससी (DFSC) की जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित इंस्पेक्टर और एफएसओ (FSO) को निलंबित तो कर दिया गया, लेकिन मुख्य दोषियों और भ्रष्ट अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने में विभाग हीलाहवाली कर रहा है। किसानों का सीधा आरोप है कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के उच्च अधिकारी और निदेशक खुद अपने कर्मचारियों को बचाने में लगे हुए हैं।
किसानों के तीखे सवालों और बढ़ते आक्रोश को देखते हुए मंत्री राजेश नागर ने मौके पर ही विभाग के निदेशक को फोन मिलाया। बातचीत के बाद मंत्री ने किसानों से आगामी मंगलवार तक का समय मांगते हुए भरोसा दिया कि तय सीमा के भीतर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करवा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मंगलवार तक कार्रवाई नहीं होती, तो किसान सीधे चंडीगढ़ आकर उनसे मिल सकते हैं।
कागजों में दौड़ती रहीं गाड़ियां: ‘फ्लिट रोबो’ की रिपोर्ट से खुलासा
मामले की परतें खोलते हुए भाकियू के युवा प्रधान मनीष मलिक और संगठन सचिव गुरलाल असमानपुर ने बताया कि यह महज एक मिल का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का काम है। उन्होंने कहा कि ‘फ्लिट रोबो’ (Fleet Robo) जीपीएस ट्रैकिंग के आधिकारिक आंकड़ों से साफ हो चुका है कि जिन गाड़ियों के नंबरों पर धान की डिलीवरी दिखाई गई, वे कभी मिल के आसपास भी नहीं भटकी थीं। सिर्फ कागजी हेराफेरी और फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए करोड़ों रुपये के धान का गबन कर लिया गया।
भाकियू के पिहोवा ब्लॉक प्रधान बलविंदर कंबोज बटेडी ने दोटूक शब्दों में कहा, “जब डीएफएससी की जांच में भ्रष्टाचार साबित हो चुका है, तो कानूनन एफआईआर अपने आप दर्ज होनी चाहिए थी। किसानों को बार-बार मंत्रियों के दरवाजे खटखटाने की नौबत क्यों आ रही है? सरकार को अपने वादों पर खरा उतरना चाहिए।”
चंडीगढ़ में बड़े आंदोलन की चेतावनी
यूनियन ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार तक इस पूरे प्रकरण में दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया, तो भाकियू का प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ में मंत्री का घेराव करेगा और वहीं से आगामी बड़े आंदोलन का ऐलान किया जाएगा।
इस दौरान मौके पर भाकियू के मिल्लू मलिक, सुखविंदर मकीमपुरा, बलविंदर बटेड़ी, गुरलाल असमानपुर, सुशील समध्यान, विनोद बाखली, काकू चीमा, डॉ. गुलजार कम्बोज, महेंद्र गुज्जर नंबरदार और जशन उप्पल समेत दर्जनों किसान नेता और ग्रामीण मौजूद रहे।
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