Nilokheri News: ‘महिला उद्यमिता से बनेगा आत्मनिर्भर हरियाणा’, नीलोखेड़ी में 7 दिवसीय ट्रेनिंग कैंप शुरू
नीलोखेड़ी संस्थान में जुटीं प्रदेश भर की महिलाएं, 7 दिनों तक सीखेंगी बिजनेस की बारीकियां
Nilokheri News: नीलोखेड़ी (महाबीर मैहला) उद्यमिता सिर्फ नया कारोबार खड़ा करने का जरिया भर नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, सोच में बदलाव और नए रोजगार गढ़ने की एक मजबूत बुनियाद है। यह बात हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान (नीलोखेड़ी) के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वे संस्थान में ‘उद्यमिता विकास’ विषय पर शुरू हुए सात दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
इस कार्यशाला की मुख्य धुरी ग्रामीण इलाकों से जुड़ी महिला संसाधन व्यक्तियों (मास्टर ट्रेनर्स) की क्षमता को निखारना है। इसका सीधा मकसद यह है कि ये प्रशिक्षित ट्रेनर्स आगे जाकर गांवों में स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं को अपना काम शुरू करने, स्वरोजगार के अवसर तलाशने और स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने में मदद कर सकें।
‘प्रशिक्षण औपचारिकता न रहे, मिशन की तरह करें काम’
संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने अपने संबोधन में साफ लहजे में कहा कि किसी भी प्रशिक्षण की सार्थकता तभी साबित होती है, जब उसका सीधा फायदा समाज की आखिरी पंक्ति में खड़ी महिला को मिले। उन्होंने कार्यशाला में हिस्सा ले रहीं महिला ट्रेनर्स से अपील की कि वे इस सात दिनों के अभ्यास को सिर्फ कागजी या औपचारिक प्रक्रिया न समझें। इसे एक मिशन की तरह लें, ताकि ग्रामीण अंचल की महिलाओं को सफल उद्यमी बनाकर ‘आत्मनिर्भर हरियाणा’ और ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को नई मजबूती दी जा सके।
डॉ. चौहान ने आगे कहा कि आज देश के ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। अगर हमारी मास्टर ट्रेनर्स सही दिशा में मार्गदर्शन करेंगी, तो यह बदलाव गांव-गांव में और तेजी से नजर आएगा।
जमीनी स्तर पर दिखेगा असर, विशेषज्ञों ने दिए काम के गुर
इससे पहले, कार्यक्रम की रूपरेखा पेश करते हुए संस्थान के सहायक आचार्य और कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुशील मेहता ने निदेशक डॉ. चौहान का स्वागत किया। डॉ. मेहता ने कहा कि इस प्रशिक्षण के जरिए प्रतिभागियों में लीडरशिप, बिजनेस मैनेजमेंट, प्रॉब्लम सॉल्विंग और नए प्रयोग करने का हुनर विकसित किया जा रहा है। ऐसे प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और उसे नई गति देने में मील का पत्थर साबित होते हैं।
सत्र के दौरान नेशनल स्किल इंस्टीट्यूट (पानीपत) से आए विषय विशेषज्ञ एल.पी. भट्ट ने आधुनिक ट्रेनिंग तकनीकों, नया उद्यम शुरू करने की बारीकियों और आज के बाजार की जरूरतों के हिसाब से हुनर विकसित करने पर विस्तार से बात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि जितनी बेहतर ट्रेनर्स की गुणवत्ता होगी, जमीन पर निकलने वाले नतीजे भी उतने ही शानदार होंगे।
इस मौके पर संस्थान के सहायक आचार्य संदीप कुमार, कमलदीप सांगवान समेत प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आईं स्वयं सहायता समूहों की प्रतिनिधि और प्रतिभागी महिलाएं मौजूद रहीं।
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