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Haryana BJP: पानीपत की डॉ. अर्चना गुप्ता बनीं हरियाणा भाजपा की नई अध्यक्ष, बड़ौली की छुट्टी

May 28, 2026 1:36 PM

हरियाणा। हरियाणा के सियासी गलियारों में पिछले कई दिनों से चल रही कयासबाजियों पर विराम लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने संगठन में बहुत बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने सबको चौंकाते हुए पानीपत की वरिष्ठ नेत्री और जानी-मानी रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना गुप्ता को हरियाणा बीजेपी का नया सूबेदार (प्रदेशाध्यक्ष) घोषित कर दिया है। सोनीपत के मोहनलाल बड़ौली को हटाकर की गई यह नियुक्ति इस मायने में भी ऐतिहासिक है क्योंकि हरियाणा बीजेपी के 43 साल के इतिहास में यह दूसरी बार है जब किसी महिला को कमान मिली है। इससे पहले साल 1980 में डॉ. कमला वर्मा को हरियाणा भाजपा की पहली महिला अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल हुआ था।

असीम गोयल का नाम पीछे छूटा, मनोहर लाल की करीबी को मिली तरक्की

इस रेस में अंबाला से पूर्व मंत्री असीम गोयल का नाम मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के करीबी होने के नाते सबसे आगे चल रहा था, लेकिन आखिरी बाजी डॉ. अर्चना गुप्ता के हाथ लगी। डॉ. अर्चना को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और संगठन का बेहद सिपहसालार माना जाता है। गौरतलब है कि साल 2024 में प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए मोहनलाल बड़ौली को बदलने की चर्चाएं पिछले कई हफ्तों से जोरों पर थीं। बीजेपी में यह परंपरा पुरानी है कि प्रदेश महामंत्री को प्रमोट करके अध्यक्ष बनाया जाता है, खुद मुख्यमंत्री नायब सैनी और निर्वतमान अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली भी अध्यक्ष बनने से पहले प्रदेश महामंत्री के तौर पर संगठन संभाल रहे थे।

डॉक्टर से फायरब्रांड नेत्री बनने तक का सफर, 6 साल में शीर्ष पर

पेशा डॉक्टरी का और पहचान एक मझे हुए राजनेता की, डॉ. अर्चना गुप्ता के करियर का ग्राफ बेहद दिलचस्प रहा है। एमबीबीएस और एमडी (गोल्ड मेडलिस्ट) रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना राजनीति में आने से पहले विश्व हिंदू परिषद की 'इंडियन हेल्थ लाइन' में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। इसके बाद उन्होंने भाजपा महिला मोर्चा के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा। साल 2020 में उनकी पहली बड़ी सियासी तरक्की तब हुई जब उन्हें पानीपत बीजेपी का जिलाध्यक्ष बनाया गया। वह पानीपत की पहली महिला जिलाध्यक्ष थीं। इसके बाद संगठन में उनके काम को देखते हुए साल 2023 में उन्हें सीधे प्रदेश महामंत्री की बड़ी जिम्मेदारी दी गई और अब वह सूबे की अध्यक्ष चुन ली गई हैं।

इन तीन बड़े समीकरणों ने डॉ. अर्चना गुप्ता के पक्ष में झुकाया पलड़ा

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो डॉ. अर्चना गुप्ता को अध्यक्ष बनाने के पीछे हाईकमान की गहरी रणनीति छिपी है। पहली वजह, वैश्य समाज जो कि भाजपा का पारंपरिक और कैडर वोटर माना जाता है, उसे इस फैसले से सीधे तौर पर साधा गया है। वर्तमान हरियाणा कैबिनेट में इस समाज से सिर्फ विपुल गोयल ही मंत्री हैं, ऐसे में शहरी इलाकों के निर्णायक वैश्य वोटरों को संदेश देना जरूरी था। दूसरी बड़ी वजह, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण बिल के बाद भाजपा देश भर में महिला केंद्रित माहौल बनाने में जुटी है, जिसमें डॉ. अर्चना सूबे की बैठकों का नेतृत्व कर रही थीं। इसके साथ ही, कोरोना काल में एक चिकित्सक के तौर पर उनकी समाज सेवा और बेदाग छवि ने भी उन्हें इस शीर्ष पद तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका निभाई है।

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