हरियाणा राज्यसभा चुनाव में बढ़ी सियासी हलचल, निर्दलीय उम्मीदवार से कांग्रेस सतर्क
Mar 09, 2026 12:46 PM
हरियाणा। हरियाणा में राज्यसभा चुनाव को लेकर चंडीगढ़ से लेकर जिलों तक सियासी हलचल तेज हो गई है। 16 मार्च को होने वाले मतदान से पहले दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में होने से मुकाबला अचानक रोचक हो गया है। भाजपा ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने कर्मबीर बौद्ध को टिकट दिया है। इसी बीच भाजपा से जुड़े निर्दलीय नेता सतीश नांदल के मैदान में उतरने से कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग की आशंका बढ़ गई है।
नामांकन वापसी की आखिरी तारीख सोमवार है। ऐसे में कांग्रेस अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें हिमाचल प्रदेश या कर्नाटक भेजने की रणनीति पर विचार कर रही है।
दूसरी सीट पर बढ़ी सियासी टेंशन
राज्यसभा की दो सीटों में से एक पर भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। दूसरी सीट को लेकर कांग्रेस अब तक सहज स्थिति में दिख रही थी।
लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के मैदान में आने से समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। नांदल भाजपा से जुड़े माने जाते हैं, इसलिए कांग्रेस को डर है कि चुनाव में जोड़-तोड़ या क्रॉस वोटिंग की स्थिति बन सकती है।
कांग्रेस ने भाजपा पर लगाए आरोप
अंबाला से कांग्रेस सांसद वरुण मुलाना ने भाजपा पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। यमुनानगर में कांग्रेस नेता गुरदयाल पुरी के निवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों दलों के एक-एक उम्मीदवार आसानी से जीत सकते थे, लेकिन भाजपा ने अतिरिक्त उम्मीदवार खड़ा कर दिया।
वरुण मुलाना ने कहा कि इससे साफ है कि भाजपा जोड़-तोड़ की राजनीति करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस मजबूत स्थिति में है और पार्टी उम्मीदवार कर्मवीर सिंह राज्यसभा चुनाव जीतेंगे।
इनेलो को लेकर हुड्डा का बयान
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इनेलो को राज्यसभा चुनाव की वोटिंग से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इनेलो न तो कांग्रेस के साथ है और न भाजपा के साथ।
हुड्डा ने कहा कि यदि अभय चौटाला भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट कराते हैं तो यह साबित हो जाएगा कि इनेलो भाजपा की ‘बी-टीम’ है।
क्या कहता है विधानसभा का गणित
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 31 वोट जरूरी होते हैं। भाजपा के पास दूसरी सीट के लिए फिलहाल 17 वोट हैं।
अगर इनेलो और तीन निर्दलीय विधायक भाजपा का समर्थन करते हैं तो यह संख्या 22 तक पहुंच सकती है। ऐसे में भाजपा को जीत के लिए 9 और वोटों की जरूरत होगी।
दूसरी तरफ कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। यदि सभी विधायक पार्टी लाइन पर वोट देते हैं तो कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध की जीत आसान मानी जा रही है।
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब
राज्यसभा चुनाव सीधे जनता के वोट से नहीं होता, लेकिन इसका असर राज्य की राजनीति पर साफ दिखाई देता है। अगर विधानसभा में क्रॉस वोटिंग या जोड़-तोड़ होती है तो आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति भी उसी हिसाब से बदल सकती है।
हरियाणा की राजनीति में राज्यसभा चुनाव अक्सर शक्ति प्रदर्शन का मंच बनते हैं। इस बार भी 16 मार्च की वोटिंग से पहले सियासी खेमों की असली ताकत सामने आने की संभावना है।