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नक्सलवाद ने वन संपदा को गहरा नुकसान पहुंचाया : भाजपा सांसद ब्रजलाल

Mar 09, 2026 9:06 PM

नयी दिल्ली: नक्सलवाद के खात्मे के साथ ही वन संपदा के समृद्ध होने की उम्मीद जताते हुए राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी के सदस्य ब्रजलाल ने कहा कि नक्सलियों की बिछाई बारुदी सुरंग फटने से सुरक्षा बलों के साथ-साथ वन भूमि और जीव-जंतुओं को भी गंभीर क्षति होती है।

उच्च सदन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के ब्रजलाल ने कहा कि नक्सलियों ने तिरुपति से लेकर पशुपति तक लाल गलियारा बनाने की योजना तैयार की थी और इसके लिए उन्होंने जो तैयारी की थी उसकी वजह से वन क्षेत्र को बहुत नुकसान पहुंचा।

उन्होंने कहा कि जिस वन संपदा पर जनजातियों का हक होता है, उसका नक्सलियों ने खुद फायदा उठाया और वनों को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि जंगलों को काट-काट कर लकड़ी बेची गई, कई दुर्लभ प्रजातियों के औषधीय पौधों की तस्करी हुई।

ब्रजलाल ने कहा कि नक्सलियों की बिछाई बारुदी सुरंग फटने से वन भूमि का बड़ा हिस्सा बर्बाद होता है क्योंकि बारुद जमीन की उर्वरता खत्म कर देती है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के साथ-साथ वन भूमि और जीव जंतुओं को भी गंभीर क्षति होती है। अगर जंगल में हाथी का पैर बारुदी सुरंग पर पड़ जाए तो कल्पना कीजिये कि उस हाथी की क्या हालत होगी।

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब वन क्षेत्र भी समृद्ध होगा जिसे नक्सलियों ने गहरा नुकसान पहुंचाया है। ब्रजलाल ने कहा कि कुख्यात वीरप्पन ने चंदन की लकड़ी की तस्करी की और उसका नाम ही चंदन तस्कर पड़ गया। उन्होंने कहा कि साल का पेड़ बहुत मजबूत होता है और इसकी लकड़ी की भी बांग्लादेश सीमा पर खूब तस्करी की गई।

उन्होंने कहा कि देश के लिए वेटलैंड भी जरूरी है। उत्तर प्रदेश के राज्य पक्षी सारस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश में एक व्यक्ति का सारस पालने का वीडियो बहुत चर्चित हुआ था और उस पर राजनीति की गई तथा उसे सांप्रदायिक रंग देने की भी कोशिश हुई थी।

उन्होंने कहा कि लेकिन यह किसी ने नहीं सोचा कि सारस उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी है और लुप्तप्राय: पक्षी की सूची में आता है। उसकी रक्षा जरूरी है।

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