August 2, 2026

Rajound News: सिविल सर्जन डॉ. रेणू चावला ने राजौंद से की पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत, पड़ोसी देशों के खतरे पर जताई चिंता

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Rajound News: सिविल सर्जन डॉ. रेणू चावला ने राजौंद से की पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत, पड़ोसी देशों के खतरे पर जताई चिंता

दो बूंद जिंदगी की! जिले में 619 बूथों और 27 मोबाइल टीमों के भरोसे पोलियो को मात देने की तैयारी शुरू

Rajound News: राजौंद| (नरेश कुमार) भले ही भारत को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से पोलियो मुक्त देश का दर्जा मिले एक दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन इस जानलेवा वायरस की वापसी का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। इसी संवेदनशीलता को भांपते हुए रविवार को जिले भर में तीन दिवसीय पल्स पोलियो अभियान का शंखनाद किया गया।

राजौंद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित मुख्य जिला स्तरीय कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. रेणू चावला ने खुद छोटे बच्चों को पोलियो रोधी खुराक पिलाई। इस मौके पर उन्होंने अभिभावकों को आगाह करते हुए कहा कि जब तक हमारे पड़ोसी देशों—पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पोलियो का एक भी मामला मौजूद है, तब तक भारत के बच्चों पर संक्रमण का खतरा बना रहेगा। यही वजह है कि सरकार इस मुहिम को लेकर कोई कोताही नहीं बरत रही है।

झुग्गी-झोपड़ी से लेकर रेलवे स्टेशन तक घेराबंदी: 619 बूथों पर मुस्तैद रहे कर्मचारी

स्वास्थ्य विभाग ने इस बार अभियान को शत-प्रतिशत कामयाब बनाने के लिए माइक्रो-प्लानिंग तैयार की है। ग्रामीण और शहरी अंचलों में आम लोगों की सुलभता के लिए 619 स्थायी पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं, जो सरकारी अस्पतालों, आंगनबाड़ियों और स्कूलों में चालू रहे।

इसके अलावा, सबसे बड़ी चुनौती उन प्रवासी परिवारों और मजदूरों के बच्चों तक पहुंचने की होती है जो ईंट-भट्टों, निर्माणाधीन इमारतों या दूर-दराज की झुग्गियों में रहते हैं। इस वर्ग को कवर करने के लिए विभाग की 27 मोबाइल टीमें दिन भर दौड़ती रहीं। वहीं, सफर कर रहे मुसाफिरों के बच्चों के लिए बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों पर 41 विशेष ट्रांजिट टीमें मुस्तैद की गई थीं, जिन्होंने चलती गाड़ियों और बसों में बच्चों को दवा पिलाई।

आज और कल घर-घर खटखटाया जाएगा कुंडा, छूटे हुए नौनिहालों की बनेगी सूची

अभियान की रणनीति के बारे में जानकारी देते हुए सिविल सर्जन ने बताया कि रविवार को पहले दिन का पूरा जोर बूथ स्तर पर रहा, जहां जागरूक अभिभावक खुद अपने 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को लेकर पहुंचे। लेकिन असली परीक्षा अगले दो दिन यानी 29 और 30 जून 2026 को होगी।

इन दो दिनों में स्वास्थ्य विभाग के वालिंटियर्स और एएनएम की टीमें जिले के हर मोहल्ले, हर गली और हर घर का दरवाजा खटखटाएंगी। इस ‘हाउस-टू-हाउस’ सर्वे का मकसद उन बच्चों को ढूंढकर दवा पिलाना है, जो रविवार को किसी वजह से बूथ तक नहीं आ पाए थे।

“भारत ने एक लंबी और कठिन लड़ाई के बाद पोलियो पर विजय पाई है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को स्थायी बनाए रखने का इकलौता तरीका यही है कि ‘हर बच्चा, हर बार’ इस खुराक को पिए। मैं जिले के सभी माता-पिता और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील करती हूं कि वे स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें। वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और आपके बच्चे के सुनहरे कल की गारंटी है।”

— डॉ. रेणू चावला, सिविल सर्जन

इस मौके पर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नवराज सिंह और चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. संदीप सिंह समेत राजौंद अस्पताल का पूरा पैरामेडिकल स्टाफ और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाई।

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