Rise Society Waterlogging: 30 हजार किराया और बेसमेंट में स्विमिंग पूल’, नोएडा की महिला ने दिखाई प्रीमियम सोसाइटी की कड़वी हकीकत
30 हजार किराया और बेसमेंट में स्विमिंग पूल', नोएडा की महिला ने दिखाई प्रीमियम सोसाइटी की कड़वी हकीकत
Rise Society Waterlogging: ऊंची-ऊंची गगनचुंबी इमारतें, जगमगाती लाइटें और ‘प्रीमियम लाइफस्टाइल’ के बड़े-बड़े दावों के पीछे छिपा कड़वा सच एक बार फिर सामने आया है। दिल्ली से सटे नोएडा में महज कुछ घंटे की बारिश ने एक पॉश सोसाइटी के दावों की हवा निकाल दी।
इंस्टाग्राम पर @decorbyaanchal नाम के हैंडल से आंचल सिंह नामक महिला ने अपनी सोसाइटी के बेसमेंट का एक वीडियो साझा किया है, जो इस वक्त इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बेसमेंट पूरी तरह पानी में डूबा नजर आ रहा है, जिस पर तंज कसते हुए महिला ने इसे सोसाइटी का ‘फ्री स्विमिंग पूल’ करार दिया।
30 हजार किराया, 4 हजार मेंटेनेंस… पर बुनियादी सुविधाएं नदारद
वीडियो में अपनी भड़ास निकालते हुए आंचल ने कहा, “कल थोड़ी सी बारिश हुई और मेरी इस तथाकथित प्रीमियम सोसाइटी के बेसमेंट का हाल देख लीजिए। 30,000 रुपये से ज्यादा का महीना किराया, 3 से 4 हजार रुपये मेंटेनेंस का खर्चा और बिजली का भारी-भरकम बिल अलग से। बदले में हमें क्या मिल रहा है? 2 करोड़ के अपार्टमेंट्स और करोड़ों की गाड़ियां खड़ी करने की जगह पर लबालब भरा पानी। लोग अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई बुनियादी सुविधाओं के लिए दे रहे हैं, लेकिन क्या यही हमारा लिविंग स्टैंडर्ड है?”
‘365 दिन चलता है कंस्ट्रक्शन, 6 साल से सुन रही हूं एक ही जुमला’
सोसाइटी प्रबंधन की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए महिला ने आगे कहा कि मेंटेनेंस के नाम पर साल के 365 दिन कंस्ट्रक्शन और मरम्मत का नाटक चलता रहता है। हर सुविधा के लिए अतिरिक्त चार्ज वसूले जाते हैं, लेकिन जब काम की बात आती है तो मेंटेनेंस टीम का एक ही रटा-रटाया जवाब होता है—’हम सोसाइटी के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं।’ महिला का कहना है कि वे पिछले 6 सालों से यही जुमला सुनती आ रही हैं, लेकिन अफसोस कि यह कल्याण आज तक सोसाइटी के बेसमेंट तक नहीं पहुंच पाया।
नोएडा के बैचलर्स के लिए यक्ष प्रश्न: घर मिल रहा है या सिर्फ महंगा पता?
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अपनी बात खत्म करते हुए आंचल ने नोएडा में भारी किराया देकर रहने वाले नौकरीपेशा युवाओं और बैचलर्स का दर्द भी बयां किया। उन्होंने सवाल उठाया, “नोएडा में जितने भी बैचलर्स 30,000 से 40,000 रुपये का किराया देकर रह रहे हैं, वे खुद बताएं—इतना मोटा पैसा खर्च करने के बाद आपको रहने के लिए एक बेहतर घर मिल रहा है या सिर्फ एक महंगा पता?”
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
कैप्शन “नोएडा निवासियों—क्या हमें वाकई वह जीवन स्तर मिल रहा है जिसके लिए हम जेब ढीली कर रहे हैं?” के साथ पोस्ट किया गया यह वीडियो अब चर्चा का विषय बन चुका है। पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, “यह बिल्कुल कड़वा सच है, प्रीमियम के नाम पर सिर्फ लूट मची है।” वहीं एक अन्य यूजर ने निराशा जताते हुए लिखा, “ऐसे बदहाल शहर में इतना किराया देने से बेहतर है कि इंसान अपने होमटाउन लौट जाए।”
