Ashima Ahlawat Asian Games: रोहतक की आशिमा अहलावत ने एशियन गेम्स में जीता सिल्वर, मां बोलीं- पति के शव पर किया वादा बेटी ने निभाया
रोहतक की आशिमा अहलावत ने एशियन गेम्स में जीता सिल्वर, मां बोलीं- पति के शव पर किया वादा बेटी ने निभाया
Ashima Ahlawat Asian Games: हरियाणा के रोहतक शहर के सेक्टर-14 की रहने वाली प्रतिभावान अंतर्राष्ट्रीय शूटर आशिमा अहलावत ने एशियाई खेलों (Asian Games) में स्वर्णिम चमक बिखरते हुए महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक (Silver Medal) पर कब्जा जमाया है। पदक जीतकर जब आशिमा अपने गृह नगर रोहतक पहुंचीं, तो परिजनों और शहरवासियों ने ढोल-नगाड़ों और विजय जुलूस के साथ उनका जोरदार स्वागत किया।
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देश का परचम लहराने के बाद आशिमा के घर में जहां एक तरफ खुशी का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ उनकी मां डॉ. सुमित्रा अहलावत की आंखें गर्व और पुरानी यादों के आंसुओं से नम हो गईं।
‘पति के पार्थिव शरीर पर हाथ रखकर लिया था संकल्प’
बेटी के गले में मेडल देखकर बेहद भावुक हुईं मां डॉ. सुमित्रा अहलावत ने कहा कि जब आशिमा के पिता का असमय निधन हुआ था, तब उन्होंने उनके पार्थिव शरीर पर हाथ रखकर यह प्रतिज्ञा ली थी कि एक दिन उनकी बेटी पूरे विश्व में उनका और परिवार का नाम रोशन करेगी। डॉ. सुमित्रा ने नम आंखों से कहा, “आज जब मैंने अपनी बच्ची के गले में एशियन गेम्स का मेडल देखा, तो लगा कि मेरे पति का अधूरा सपना पूरा हो गया। एक मां के लिए इससे बड़ा गर्व का क्षण नहीं हो सकता।”
वहीं आशिमा ने अपनी सफलता पर खुशी जताते हुए कहा, “एशियन गेम्स में मेडल जीतना मेरा सबसे बड़ा सपना था, जो आज सच हुआ है। जब मैंने शूटिंग रेंज में कदम रखा था, तब से मेरा एक ही लक्ष्य था। मुकाबला बेहद कठिन था, लेकिन अंतिम क्षणों में मैंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत रखा और सटीक निशाना साधा।”
मनु भाकर को टीवी पर देखकर जागी थी शूटिंग की ललक
आशिमा अहलावत के शूटर बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प और प्रेरणादायक है। आशिमा ने बताया कि एक दिन वह अपने घर के लिविंग रूम में टीवी पर मशहूर शूटर मनु भाकर को शूटिंग करते देख रही थीं। मनु को देखकर उनके मन में भी निशानेबाजी को लेकर गहरी जिज्ञासा जागी। जब उन्होंने अपनी मां के सामने शूटिंग सीखने की इच्छा जताई, तो मां ने एक अनूठी शर्त रख दी।
मां डॉ. सुमित्रा ने कहा कि अगर वह 12वीं कक्षा में 98 प्रतिशत अंक हासिल करेगी, तभी उसे शूटिंग रेंज में जाने की इजाजत मिलेगी। आशिमा ने इस चुनौती को स्वीकार किया और जी-तोड़ मेहनत करते हुए 12वीं बोर्ड परीक्षा में 98.6 प्रतिशत अंक हासिल कर दिखाए। इसके बाद मां ने अपना वादा निभाया और आशिमा की निशानेबाजी की ट्रेनिंग शुरू कराई।
कुश्ती से शॉटगन रेंज तक का सफर, कजाकिस्तान में भी जीता था गोल्ड
आशिमा ने अपनी शुरुआती स्पोर्ट्स लाइफ का एक मजेदार पहलू साझा करते हुए बताया कि उनकी बहन कुश्ती लड़ने जाती थी, तो वह भी बस मजे-मजे में उसके साथ अखाड़े चली जाया करती थीं। लेकिन जब उन्होंने पहली बार शॉटगन शूटिंग रेंज का रुख किया, तो उनका मन वहीं रम गया। पिछले 5 सालों से कड़ी मेहनत कर रहीं आशिमा इससे पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पदक जीत चुकी हैं।
गौर हो कि साल 2025 में कजाकिस्तान के शिमकेंट में आयोजित 16वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में आशिमा ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाते हुए ट्रैप टीम इवेंट में गोल्ड मेडल और व्यक्तिगत स्पर्धा में ब्रोंज मेडल अपने नाम किया था।
अब ओलंपिक कोटा हासिल करने पर पूरी नजर
अपनी इस स्वर्णिम कामयाबी के बाद भी आशिमा रुकने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि उनका अगला और सबसे मुख्य फोकस ओलंपिक के लिए कोटा हासिल करना है। आशिमा ने कहा, “ओलंपिक का कोटा हासिल करना अपने आप में बेहद कठिन चुनौती है। लेकिन इसके लिए मैं जल्द ही दोबारा शूटिंग रेंज में उतरकर अपनी प्रैक्टिस शुरू करूंगी और देश के लिए ओलंपिक पदक जीतने का सपना पूरा करूंगी।”
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