Sawan Last Day Puja: सावन का आखिरी दिन आज, पूरे महीने नहीं कर पाए पूजा? 28 अगस्त को चढ़ाएं ये चीजें, मिलेगा पूरा फल

सावन का आखिरी दिन आज, पूरे महीने नहीं कर पाए पूजा? 28 अगस्त को चढ़ाएं ये चीजें, मिलेगा पूरा फल
Sawan Last Day Puja: आज 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा के पावन अवसर के साथ ही भगवान भोलेनाथ की भक्ति को समर्पित यह पवित्र महीना विश्राम लेने जा रहा है। पूरे सावन भर श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास किया। हालांकि, यदि आप किसी कारणवश पूरे महीने नियमित रूप से मंदिर नहीं जा पाए या विधि-विधान से पूजा नहीं कर सके, तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है।
शास्त्रों और सनातन परंपरा के अनुसार, सावन के अंतिम दिन सही विधि और विशेष सामग्रियों के साथ की गई एक दिन की पूजा भी पूरे सावन की आराधना के बराबर फल प्रदान करती है।
कनेर का फूल: धन-धान्य और समृद्धि का द्वार
भगवान शिव की पूजा में कनेर के पुष्प का अत्यंत विशेष स्थान है। सावन के अंतिम दिन पूजा के समय शिवलिंग पर कनेर का ताजा पीला या लाल फूल अवश्य चढ़ाएं। धार्मिक मान्यता है कि कनेर के फूल से महादेव का पूजन करने पर दरिद्रता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
कनेर के फूल को अर्पित करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें और साथ में शुद्ध जल व बेलपत्र अर्पित करना न भूलें।
चार या पांच पत्तियों वाला दुर्लभ बेलपत्र: पंचमुखी शिव का आशीर्वाद
सामान्य तौर पर शिव पूजन में तीन पत्तियों वाले बेलपत्र का ही प्रयोग किया जाता है, जो त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और शिव के तीन नेत्रों का प्रतीक माना जाता है। लेकिन यदि सावन के आखिरी दिन आपको चार या पांच पत्तियों वाला बेलपत्र मिल जाता है, तो यह अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग होता है।
शास्त्रों में पांच पत्तियों वाले बेलपत्र को ‘पंचमुखी महादेव’ का ही स्वरूप माना गया है। सावन के अंतिम दिन ऐसा दुर्लभ बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है और रुका हुआ धन व मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं। वहीं, चार पत्तियों वाला बेलपत्र जीवन में स्थिरता और खुशहाली लाता है। मान्यता यह भी है कि यदि किसी को 11 पत्तियों वाला बेलपत्र मिल जाए, तो वह महाफलदायी होता है।
बेलपत्र अर्पित करते समय रखें इन बातों का ध्यान
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय कुछ शास्त्रीय नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है:
अखंडित हो पत्र: बेलपत्र कहीं से भी टूटा-फूटा, कटा हुआ या कीड़ों का खाया हुआ नहीं होना चाहिए।
सही दिशा: बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी चिकनी और चमकीली सतह हमेशा शिवलिंग के स्पर्श में होनी चाहिए।
जल अर्पण: बेलपत्र अर्पित करने के तुरंत बाद तांबे के लोटे से शिवलिंग पर पतली धार से जल चढ़ाएं और अपने मन की इच्छा भोलेनाथ के सामने दोहराएं।
क्यों खास है सावन के आखिरी दिन का पूजन?
सावन का अंतिम दिन पूर्णता का प्रतीक है। इस दिन कनेर के पुष्प, चार-पांच पत्तियों वाले बेलपत्र, धतूरा और गंगाजल से किया गया पूजन मन को शांति और जीवन को ऊर्जा प्रदान करता है। आज के दिन किए गए जप और दान से वर्ष भर शिव कृपा बनी रहती है और घर के सारे संकट टल जाते हैं।
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