August 16, 2026

Work Life Viral: क्यों विदेश जाना चाहते हैं भारतीय युवा? वायरल वीडियो में महिला ने बताई असली वजह

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Work Life Viral: क्यों विदेश जाना चाहते हैं भारतीय युवा? वायरल वीडियो में महिला ने बताई असली वजह

क्यों विदेश जाना चाहते हैं भारतीय युवा? वायरल वीडियो में महिला ने बताई असली वजह

Work Life Viral: कार्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले ज्यादातर भारतीयों की दिनचर्या अक्सर ऑफिस, भारी ट्रैफिक और फिर अगले दिन के वही काम के चक्रव्यूह में उलझकर रह जाती है। इसी जमीनी हकीकत को बयां करता ब्रिटेन में रहने वाली एक भारतीय महिला अनुष्का व्यास का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब देखा जा रहा है। अनुष्का ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल (@anushkavyas4) से एक वीडियो साझा कर ब्रिटेन और भारत के वर्क-लाइफ बैलेंस की तुलना की है, जिसने एक बार फिर काम के घंटे और जीवन की गुणवत्ता पर बहस छिड़ दी है।

गुरुवार शाम का पार्क और लोगों का सुकून

वीडियो में अनुष्का अपने घर के पास स्थित एक स्थानीय पार्क में खड़ी होकर शाम करीब 5:30 बजे का नजारा दिखाती हैं। वे बताती हैं कि न तो यह कोई वीकेंड है और न ही कोई सरकारी छुट्टी, फिर भी पार्क में लोग अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाते, बच्चों के साथ खेलते और फिटनेस पर ध्यान देते नजर आ रहे हैं। अनुष्का कहती हैं, “यूके में 9 से 5 की नौकरी खत्म होते ही लोग अपनी निजी जिंदगी जीने के लिए आजाद हो जाते हैं। परिवार को समय देना और सेहत का ध्यान रखना यहां की जीवनशैली का सामान्य हिस्सा है।”

“भारत में 5 बजे के बाद सुकून सिर्फ एक कल्पना”

भारत की कॉरपोरेट लाइफस्टाइल पर बात करते हुए अनुष्का ने कहा कि भारत में 9 से 5 की ड्यूटी के बाद इस तरह के सुकून की कल्पना करना भी लगभग असंभव है। दफ्तर से छूटने के बाद घंटों ट्रैफिक से जूझना, अचानक बॉस का एक्स्ट्रा काम थमा देना और घर पहुंचते-पहुंचते पूरी तरह ढल चुकी शाम—ये सब भारतीय कर्मचारियों की रोजमर्रा की कहानी है। नतीजतन, लोग हफ्ते भर सिर्फ वीकेंड का इंतजार करते हैं और जब वीकेंड आता भी है, तो शरीर इतना थका होता है कि वह समय सिर्फ थकान मिटाने में निकल जाता है। न खुद के लिए वक्त बचता है और न ही परिवार के लिए।

क्वालिटी ऑफ लाइफ है विदेश बसने की वजह

 

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अनुष्का के मुताबिक, यही वजह है कि आज बड़ी संख्या में भारतीय युवा विदेश का रुख कर रहे हैं। वहां सिर्फ अच्छी सैलरी या बड़ा पद ही आकर्षण नहीं है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) और मानसिक शांति सबसे अहम कारक बन चुकी है। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, “भारत के लिए 9 से 5 सिर्फ नाम का है।” इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की भी जोरदार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि भारतीय कॉरपोरेट कल्चर में तुरंत सुधार की जरूरत है, वहीं कुछ का कहना था कि भारत में काम के बाद थोड़ी सी शांति पाना भी किसी लग्जरी से कम नहीं रह गया है।

(डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। हम इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते हैं।)

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