सीएम धामी ने लॉन्च किया 'क्यालु-हिम तेंदुआ' शुभंकर, धावकों संग खुद लगाई दौड़
May 23, 2026 10:29 AM
उत्तराखंड। उत्तराखंड के सीमांत पर्वतीय क्षेत्रों को एडवेंचर टूरिज्म का नया ग्लोबल हब बनाने की दिशा में शनिवार को एक बड़ा अध्याय जुड़ गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से 'नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026' के काउंटडाउन रन का फ्लैग ऑफ किया। सीएम ने पारंपरिक रीति से मशाल प्रज्ज्वलित की और फिर खुद स्पोर्ट्स लुक में आकर धावकों के साथ एक प्रतीकात्मक दौड़ का हिस्सा बने। इसी के साथ आगामी 31 मई को चमोली जिले की नीति घाटी की बर्फीली ऊंचाइयों पर होने वाली इस ऐतिहासिक रेस की उलटी गिनती शुरू हो गई है।
"क्यालु- हिम तेंदुआ" होगा शुभंकर, सीएम बोले- यह सिर्फ रेस नहीं, नया विश्वास है
इस भव्य मौके पर मुख्यमंत्री धामी ने इस रेस के आधिकारिक शुभंकर (मस्कट) "क्यालु- हिम तेंदुआ" का अनावरण किया। हिमालय की दुर्गम चोटियों पर पाए जाने वाले स्नो लेपर्ड को 'क्यालु' नाम देकर देवभूमि की वन्यजीव संपदा को इस दौड़ से जोड़ा गया है। युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन महज शारीरिक क्षमता की परीक्षा या कोई सामान्य रेस नहीं है, बल्कि यह हमारे पहाड़ के सीमांत क्षेत्रों में नई ऊर्जा, नए अवसर और नए विश्वास को फूंकने का एक बड़ा अभियान है। उन्होंने कहा कि आज युवाओं के कदमों की जो गूंज राजधानी में सुनाई दे रही है, वह जल्द ही नीति घाटी में नया इतिहास रचेगी।
27 राज्यों और दो देशों से आ रहे एथलीट, एडवेंचर टूरिज्म का नया स्वर्णिम काल
उत्तराखंड के खेल और पर्यटन इतिहास में यह आयोजन कितना बड़ा होने जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के 27 राज्यों और दो अन्य देशों से 900 से ज्यादा जांबाज धावकों ने इसके लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। नीति घाटी जैसे कम ऑक्सीजन और अत्यधिक विषम परिस्थितियों वाले क्षेत्र में दौड़ने के लिए प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए हिमालय जैसा अडिग विश्वास और बुलंद हौसला चाहिए। उन्होंने सभी एथलीटों को देवभूमि के साहस, पर्यटन और सामर्थ्य का असली ब्रांड एंबेसडर करार दिया।
सीमांत गांवों को मिलेगा बिजनेस, होमस्टे और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को दोहराया जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के सीमावर्ती गांव अंतिम नहीं, बल्कि देश के पहले गांव हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन से नीति घाटी के स्थानीय लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और धावकों की वजह से सीमांत क्षेत्रों में होमस्टे कारोबार चमकेगा, स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी और युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे जिससे पहाड़ों में पलायन पर भी रोक लगेगी। इस मौके पर पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल और पर्यटन विकास परिषद के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र भंडारी सहित खेल जगत से जुड़ी कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं।