वनाग्नि रोकने के लिए पूरे उत्तराखंड में लागू होगा 'शीतलखेत मॉडल', सीएम धामी ने जारी किए कड़े निर्देश
May 22, 2026 12:59 PM
उत्तराखंड। उत्तराखंड के जंगलों में भड़कती आग और गर्मियों की चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मोर्चा संभाल लिया है। देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में सीएम ने वनाग्नि नियंत्रण, पेयजल संकट, स्वास्थ्य सेवाओं और आगामी मानसून की तैयारियों की मैराथन समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने दो टूक लहजे में कहा कि वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले उपद्रवियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने जंगलों की आग पर रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम करने का निर्देश देते हुए कहा कि जैसे ही आग की सूचना मिले, संबंधित वनाधिकारी एक घंटे के भीतर मौके पर मौजूद होने चाहिए। जवाबदेही तय करने के इस कड़े निर्देश से सुस्त पड़े वन महकमे में हड़कंप मचना तय है।
शीतलखेत मॉडल से बुझेगी आग, 1000 फॉरेस्ट गार्ड्स की होगी सीधी भर्ती
पहाड़ों में पारंपरिक रूप से आग बुझाने के तरीकों को आधुनिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा के 'शीतलखेत मॉडल' को पूरे प्रदेश में लागू करने पर जोर दिया। इस मॉडल के तहत फायर लाइन के आसपास छोटी-छोटी तलैया (वॉटर बॉडीज) बनाई जाती हैं, ताकि आग बुझाने के लिए पानी तुरंत मिल सके। जंगलों में मैनपावर की कमी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने बड़ा फैसला लेते हुए फॉरेस्ट गार्ड के 1000 खाली पदों पर तत्काल नई नियुक्तियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, जमीनी स्तर पर काम करने वाली ग्राम समितियों और वन पंचायतों को आग रोकने के लिए अलग से बजट अलॉट किया जाएगा। मानव-वन्यजीव संघर्ष को थामने के लिए अब वन विभाग के हर डिवीजन में पशु चिकित्सकों (veterinary doctors) की तैनाती भी अनिवार्य कर दी गई है।
पानी-बिजली संकट पर पैनी नजर, लापरवाही पर कसेगा शिकंजा
उत्तराखंड के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में गहराते जा रहे पेयजल संकट पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थाटन और पर्यटन स्थलों सहित राज्य के किसी भी हिस्से में आम जनता को पानी के लिए परेशान न होना पड़े। जहां भी किल्लत है, वहां तुरंत पेयजल टैंकरों की पूरी उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और टूटी हुई पाइपलाइनों को युद्धस्तर पर ठीक किया जाए। बिजली कटौती की शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए सीएम ने ऊर्जा विभाग को राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने और घरेलू स्तर पर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है।
मानसून को लेकर प्रभारी सचिवों को जिलों में जाने के आदेश, अस्पतालों का होगा फायर ऑडिट
आगामी मानसून सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने अभी से कमर कसने को कहा है। उन्होंने सभी जनपदों के प्रभारी सचिवों को निर्देश दिए हैं कि वे केवल दफ्तरों में न बैठें, बल्कि अपने-अपने प्रभार वाले जिलों का स्थलीय निरीक्षण कर संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा पुख्ता करें। वहीं, देश के अन्य हिस्सों के अस्पतालों में हाल ही में हुए हादसों से सबक लेते हुए सीएम ने उत्तराखंड के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों का अनिवार्य रूप से 'फायर सेफ्टी ऑडिट' कराने का हुक्म दिया है। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि मानसून के दौरान गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस सेवा का पूरा डेटाबेस तैयार रखा जाए।
चारधाम यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि, स्क्रीनिंग में अनफिट तो यात्रा नहीं
इस समय चल रही चारधाम यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। केदारनाथ, बद्रीनाथ सहित चारों धामों के रूट पर चल रहे हेल्थ स्क्रीनिंग कैंपों को लेकर उन्होंने कहा कि जो भी श्रद्धालु स्वास्थ्य की दृष्टि से फिट नहीं मिल रहे हैं, उन्हें आगे की यात्रा न करने के लिए समझाया और प्रेरित किया जाए। बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा सहित शासन के सभी आला अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें इन फैसलों पर तत्काल अमल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।