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उत्तराखंड में जंगलों की आग बनी जानलेवा: आग बुझाने गए फायर वॉचर की खाई में गिरकर मौत, टिहरी में जिंदा जली महिला

May 21, 2026 12:06 PM

चमोली: उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में जंगलों की आग लगातार भयावह रूप लेती जा रही है। चमोली, उत्तरकाशी और टिहरी के कई वन क्षेत्रों में भीषण आग धधक रही है, जिससे वन संपदा के साथ-साथ मानव जीवन भी खतरे में पड़ गया है। चमोली जिले के बिरही क्षेत्र में आग बुझाने गए फायर वॉचर राजेंद्र सिंह की खाई में गिरने से मौत हो गई, जबकि टिहरी जिले के कीर्तिनगर क्षेत्र में आग रोकने गई एक महिला जिंदा जल गई। उत्तरकाशी में जंगलों से उठता धुआं शहर तक पहुंच गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। तेज गर्मी और सूखे चीड़ के जंगलों के कारण आग तेजी से फैल रही है और कई जगह रिहायशी इलाकों तक पहुंचने लगी है।

चमोली में फायर वॉचर और टिहरी में महिला की जिंदा जलकर मौत

चमोली जिले के बिरही क्षेत्र में बुधवार दोपहर चीड़ के जंगलों में भीषण आग लग गई थी। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलती हुई आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ने लगी। हालात को देखते हुए वन विभाग ने फायर वॉचरों की टीम मौके पर भेजी। करीब 15 सदस्यीय टीम आग बुझाने में जुटी थी, जिसमें ज्योतिर्मठ विकासखंड के पाखी-जलग्वाड़ गांव निवासी 43 वर्षीय राजेंद्र सिंह भी शामिल थे। देर शाम तक टीम ने आग पर काफी हद तक काबू पा लिया था, लेकिन वापस लौटते समय राजेंद्र सिंह लापता हो गए। साथियों ने इसकी सूचना अधिकारियों को दी, जिसके बाद वन विभाग, पुलिस और एसडीआरएफ ने रातभर सर्च ऑपरेशन चलाया। गुरुवार सुबह उनका शव करीब 70 मीटर गहरी खाई में झुलसी हालत में मिला। आशंका जताई जा रही है कि आग बुझाने के दौरान वह चट्टान से फिसलकर नीचे गिर गए।

टिहरी जिले के कीर्तिनगर विकासखंड की ग्राम पंचायत पैंडुला में भी जंगल की आग ने एक महिला की जान ले ली। 50 वर्षीय अंजू देवी अपने घर की ओर बढ़ रही आग को रोकने के लिए जंगल की तरफ गई थीं। इसी दौरान वह आग की चपेट में आ गईं और बुरी तरह झुलसने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों को देर रात तक उनके घर नहीं लौटने पर घटना की जानकारी मिली। गांव में इस घटना के बाद शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में लगातार फैल रही आग के कारण गांवों के पास रहने वाले लोगों में डर बना हुआ है।

उत्तरकाशी में शहर तक पहुंचा धुआं, नारायणबगड़ में 5500 पौधे जलकर राख

उत्तरकाशी जनपद के बासुंगा, ज्ञानसू और साल्ट रोड स्थित जंगलों में लगी आग लगातार फैल रही है। आग की ऊंची लपटें पहाड़ियों पर दूर-दूर तक दिखाई दे रही हैं। हालात इतने खराब हो गए कि जंगलों से उठता काला धुआं जनपद मुख्यालय और आसपास के इलाकों तक पहुंच गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि धुएं के कारण कई इलाकों में दृश्यता कम हो गई है। वन विभाग, फायर सर्विस और एसडीआरएफ की टीमें लगातार आग बुझाने में जुटी हुई हैं। हालांकि तेज हवाओं और सूखे जंगलों के कारण आग पर नियंत्रण पाने में दिक्कत आ रही है।

चमोली जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र में पश्चिमी पिंडर रेंज के अंतर्गत लेगुना गांव के नीचे वन भूमि क्षेत्र में लगी आग ने भारी नुकसान पहुंचाया है। आग की चपेट में आने से वर्ष 2025 में लगाए गए करीब 5500 शिशु पौधे जलकर राख हो गए। इसके अलावा लाखों रुपए की वन संपदा को भी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों का आरोप है that जंगल में आग दो दिनों तक धधकती रही, लेकिन वन विभाग समय पर इसे नियंत्रित नहीं कर पाया। घटना के बाद ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी बढ़ गई है। लोगों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

वन विभाग ने बीमा और सहायता का दिया भरोसा

बद्रीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ सर्वेश दुबे ने बताया कि फायर वॉचरों का विभाग की ओर से जोखिम बीमा कराया जाता है। दुर्घटना की स्थिति में परिवार को करीब 10 लाख रुपए तक की सहायता दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि मृतक के परिवार के एक सदस्य को अस्थायी नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया है। वन विभाग के अनुसार प्रदेश में लगातार बढ़ती गर्मी और तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है। विभागीय टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रही हैं, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

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