Viral Video: 97 साल की दादी का उड़ते प्लेन पर हैरतअंगेज स्टंट, स्ट्रोक को मात देकर तोड़ा अपना ही गिनीज रिकॉर्ड
97 साल की दादी का उड़ते प्लेन पर हैरतअंगेज स्टंट: स्ट्रोक को मात देकर तोड़ा अपना ही गिनीज रिकॉर्ड
Viral Video: ‘जिंदगी से ऊबने से तो बेहतर है कि बादलों के बीच कुछ रोमांचक किया जाए।’ यह महज कोई कहावत नहीं, बल्कि 97 साल की एक ऐसी जांबाज बुजुर्ग महिला का जीवन-मंत्र है, जिन्होंने अपनी उम्र और शारीरिक लाचारी को हवा में उड़ा दिया है।
ब्रिटेन की रहने वाली बेट्टी ब्रोमेज (Betty Bromage) ने स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारी से उबरने के ठीक एक साल बाद उड़ते हुए प्लेन के पंख पर खड़े होकर (Wing Walking) अपना ही गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Records) तोड़ दिया। आसमान की ऊंचाइयों में हवा को चीरते हुए उनके इस साहसिक कारनामे को जिसने भी देखा, वह दंग रह गया।
97 साल और 127 दिन की उम्र में रचा नया इतिहास, 6वीं बार की विंग वॉकिंग
चेल्टेनहैम की रहने वाली बेट्टी ब्रोमेज ने साइरेंसस्टर के आरएफसी रेंडकॉम्ब एयरफील्ड में इस ऐतिहासिक उड़ान को अंजाम दिया। जब बेट्टी हवा में प्लेन के विंग्स पर बंधी खड़ी थीं, उस वक्त उनकी सटीक उम्र 97 साल और 127 दिन थी।
बेट्टी ने इससे पहले साल 2022 में 93 वर्ष की उम्र में ‘दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला विंग वॉकर’ का खिताब अपने नाम किया था। दिलचस्प बात यह है कि बेट्टी ने 87 वर्ष की उम्र में पहली बार विंग वॉकिंग शुरू की थी और तब से लेकर अब तक वे 6 बार यह खतरनाक कारनामा सफलतापूर्वक कर चुकी हैं।
हॉस्पिटल का कर्ज चुकाने के लिए भरी उड़ान, जुटाई चैरिटी राशि
बेट्टी के लिए यह विंग वॉक सिर्फ अपने निजी रोमांच का जरिया नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक गहरा मानवीय मकसद भी छिपा था। दरअसल, अगस्त 2025 में उन्हें एक बेहद गंभीर स्ट्रोक आया था, जिसके चलते आज भी उन्हें बोलने में हल्की परेशानी होती है।
चेल्टेनहैम जनरल हॉस्पिटल के स्ट्रोक यूनिट के डॉक्टरों ने दिन-रात एक करके उनका इलाज किया था और उन्हें इस काबिल बनाया। बेट्टी ने अपनी इस जानलेवा उड़ान के जरिए उसी अस्पताल के लिए फंड जुटाया, ताकि स्ट्रोक से जूझ रहे अन्य मरीजों का भी बेहतर इलाज हो सके।
मुस्कुराते हुए बोलीं— ‘जिंदगी जीने का नाम है, रुकने का नहीं’
जब बीबीसी से बातचीत के दौरान बेट्टी से पूछा गया कि इतनी उम्र और गंभीर बीमारी के बाद ऐसा जानलेवा स्टंट करते वक्त क्या उन्हें डर नहीं लगा? तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया कि जब आप किसी नेक मकसद के लिए बाहर निकलते हैं, तो डर अपने आप गायब हो जाता है। स्ट्रोक के बाद लोगों को लगता है कि जिंदगी खत्म हो गई, लेकिन वे साबित करना चाहती थीं कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र और बीमारी का कोई भी दायरा आपको आसमान छूने से नहीं रोक सकता।
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