Search

Shenaz Treasury: श्रीलंका के रेलवे स्टेशन से शेनाज ट्रेजरी का विवादित वीडियो, बताया 'सबसे गंदा देश'

May 28, 2026 4:29 PM

अपनी घुमक्कड़ी और ट्रैवल व्लॉग्स के लिए मशहूर पूर्व वीजे और एक्ट्रेस शेनाज ट्रेजरी के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। पड़ोसी मुल्क श्रीलंका की सैर पर निकलीं शेनाज ने वहां के प्रसिद्ध एला रेलवे स्टेशन का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया।

पहाड़ों के बीच बसे इस बेहद खूबसूरत और छोटे से स्टेशन की सफाई से शेनाज इस कदर प्रभावित हुईं कि उन्होंने सीधे भारत की नागरिक आदतों (सिविक सेंस) पर ही सवाल दाग दिए। कैमरे के सामने वहां की चकाचक व्यवस्था दिखाते हुए उन्होंने कह दिया, "सच तो यह है कि हम (भारत) दुनिया के सबसे गंदे देश हैं।" उनका यह बयान इंटरनेट पर आते ही आग की तरह फैल गया और भारतीय यूजर्स के बीच आत्ममंथन और गुस्से की नई बहस शुरू हो गई।

'सच कड़वा है पर हकीकत यही है' – एक धड़े ने किया समर्थन

वीडियो के कमेंट सेक्शन में नेटिजन्स के बीच इस वक्त जबरदस्त घमासान चल रहा है। एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो शेनाज के इस तीखे बयान से पूरी तरह सहमत नजर आ रहा है। इन यूजर्स का कहना है कि बात भले ही चुभने वाली हो, लेकिन यह हमारी जमीनी हकीकत है। लोगों ने तंज कसते हुए लिखा कि भारत में प्राकृतिक खूबसूरती की कोई कमी नहीं है, लेकिन हमारे यहां लोगों में सिविक सेंस का भारी अभाव है।

सरकार चाहे जितने भी सफाई अभियान चला ले, जब तक लोग खुद पहाड़ों, ऐतिहासिक इमारतों और समंदर के किनारों पर प्लास्टिक और कचरा फेंकना बंद नहीं करेंगे, तब तक हालात नहीं बदलेंगे। कुछ ने यह भी चुटकी ली कि भारतीय विदेशों में जाकर तो कायदे-कानून मानते हैं, लेकिन अपने देश लौटते ही लापरवाह हो जाते हैं।

'आबादी और छोटे स्टेशन की तुलना गलत' – ट्रोलर्स ने सिखाया सबक

दूसरी तरफ, सोशल मीडिया का एक बड़ा हिस्सा शेनाज के इस सामान्यीकरण (जनरलाइजेशन) से बुरी तरह भड़का हुआ है। लोगों का तर्क है कि श्रीलंका के एक छोटे और गिने-चुने टूरिस्ट स्पॉट की तुलना भारत के उन रेलवे स्टेशनों से करना पूरी तरह अतार्किक है, जहां रोजाना लाखों यात्रियों की आवाजाही होती है।

कई यूजर्स ने शेनाज को याद दिलाया कि भारत में भी इंदौर, मैसूरु और गंगटोक जैसे शहर हैं, जो स्वच्छता के अंतरराष्ट्रीय मानकों को टक्कर देते हैं। साथ ही, 'स्वच्छ भारत मिशन' के बाद देश के रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थलों की सूरत में जो क्रांतिकारी बदलाव आया है, उसे इस तरह एक झटके में खारिज नहीं किया जा सकता।

You may also like:

Please Login to comment in the post!