Yamunanagar News: जगाधरी-पांवटा साहिब रोड पर आया जंगली हाथी, गाड़ियों की लगी लंबी कतार
जगाधरी-पांवटा साहिब मार्ग पर थमी गाड़ियों की रफ्तार, सड़क के बीच टहलता दिखा एक दांत वाला हाथी
Yamunanagar News: मानसून की सुहानी फुहारों के बीच यमुनानगर के कलेसर नेशनल पार्क से एक दिलचस्प और दहशत भरा नजारा सामने आया है। मंगलवार ढलती शाम कलेसर के घने जंगलों से निकलकर एक दांत वाला एक विशालकाय जंगली हाथी सीधे जगाधरी-पांवटा साहिब नेशनल हाईवे पर आ पहुंचा। सड़क के बीचों-बीच अचानक गजराज को ठाठ से टहलता देख दोनों तरफ से आ-जा रहे वाहन चालकों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में चालकों ने गाड़ियां रोक लीं, जिससे हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
राहगीरों और स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा। राहत की बात यह रही कि लोगों ने समझदारी दिखाई और किसी ने भी गाड़ी का हॉर्न बजाकर या पास जाकर हाथी को छेड़ने या उकसाने की हिमाकत नहीं की। सड़क पर मौजूद सभी लोग अपनी-अपनी गाड़ियों के शीशे बंद कर दूर से ही उसके वापस लौटने का इंतजार करते रहे। इस पूरी घटना को कुछ चालकों ने अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
सड़क छोड़ आम के बाग में घुसा हाथी, खेतों के रास्ते वापस लौटा जंगल
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह युवा हाथी काफी देर तक बिल्कुल बेफिक्र अंदाज में सड़क पर चहल-कदमी करता रहा। इसके बाद उसने सड़क किनारे स्थित अंबाला के एक वरिष्ठ अधिकारी के आम के बाग की तरफ अपना रुख कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह हाथी बेहद चालाक है और आम के मीठे फलों का लालच इसे अक्सर जंगल की सीमा से बाहर खींच लाता है। बाग में कुछ देर रुककर आम के फलों का स्वाद चखने के बाद वह आसपास के खेतों के रास्ते शांति से वापस कलेसर के जंगलों की ओर ओझल हो गया।
वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो मानसून की बारिश के बाद कलेसर नेशनल पार्क का पूरा इलाका हरा-भरा हो चुका है। मौसम सुहावना होते ही जंगली जानवरों की आवाजाही और सक्रियता काफी बढ़ जाती है। इन दिनों पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के प्रसिद्ध राजाजी नेशनल पार्क से हाथियों का एक बड़ा झुंड कलेसर के जंगलों में डेरा डाले हुए है। यह एकदंत हाथी भी उसी झुंड से अलग होकर शाम के वक्त चहलकदमी करने सड़क तक आ गया था।
आपसी जंग में टूटा था एक दांत, जानिए क्यों ‘आम’ का दीवाना है यह हाथी
वन्यजीव विभाग के दरोगा जसवंत सिंह ने बताया कि इस हाथी की पहचान इलाके में काफी पुरानी है। हाथियों के आपसी वर्चस्व की लड़ाई के दौरान इसका एक दांत टूट गया था, जिसके बाद से ही इसे स्थानीय स्तर पर ‘एकदंत’ के नाम से जाना जाता है। यह हाथी पहले भी कलेसर गांव के आसपास के खेतों में कई बार देखा जा चुका है और फसलों को थोड़ा-बहुत नुकसान पहुंचा चुका है।
वन्य जीव रक्षक सुमित कुमार ने बताया कि इस हाथी को आम बेहद पसंद हैं और आम के सीजन में यह कई बार बागों की तरफ रुख करता है। उन्होंने बताया कि इस घटना के दौरान किसी भी तरह की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। विभाग ने स्थानीय निवासियों और हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों से अपील की है कि जंगल से सटे इलाकों में जंगली जानवरों के सामने आने पर हमेशा सुरक्षित दूरी बनाए रखें और उन्हें बिल्कुल भी उकसाने की कोशिश न करें।
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