कलेसर जंगल में सूखा पानी, प्यास बुझाने हाईवे पार कर यमुना नदी पहुंचे जंगली हाथी
May 28, 2026 6:06 PM
यमुनानगर। (रघबीर सिंह) कंक्रीट की सड़कों और तपते शहरों के बीच जब उत्तर भारत का पारा 45 डिग्री के पार जाने लगा है, तो इसका सबसे दर्दनाक असर बेजुबान वन्यजीवों पर पड़ रहा है। हरियाणा, हिमाचल और उत्तराखंड की सीमाओं को छूने वाले कलेसर राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क) से इन दिनों एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। भयंकर तपिश और जंगल के भीतर पानी के पारंपरिक स्रोतों के सूख जाने के कारण, जंगली हाथियों का झुंड अब अपनी प्राकृतिक इंसुलेशन (जंगल की छांव) को छोड़कर बाहर निकलने पर मजबूर है। पिछले कुछ दिनों से इन गजराजों को यमुना नदी के पानी की आस में नेशनल हाईवे पार करते हुए देखा जा रहा है। हाथियों का इस तरह सरेआम इंसानी बस्तियों और हाईवे के करीब आना इस बात का साफ इशारा है कि कलेसर के घने जंगलों के भीतर इस वक्त पानी की भारी किल्लत चल रही है।
हाईवे पर थम रही रफ्तार, यमुना में अठखेलियां कर रहे गजराज
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इससे पहले हाथियों को इस तरह बार-बार जंगल से बाहर आते नहीं देखा गया। आम तौर पर हाथी घने जंगलों के भीतर ही रहना पसंद करते हैं क्योंकि वहां बारहमासी तालाब और झरने उनकी प्यास बुझा देते थे। लेकिन इस बार की अभूतपूर्व गर्मी ने उन जलस्रोतों को सुखा दिया है। अब हालत यह है कि देर शाम या तड़के सुबह हाथियों का यह पूरा कुनबा हाईवे के किनारे खड़ा दिखाई दे जाता है, जिससे गुजरने वाले ट्रकों और कारों की रफ्तार थम जाती है। हाईवे पार करने के बाद ये हाथी सीधे यमुना नदी की जलधारा में उतर जाते हैं। पानी में उतरकर सूंड से फुहारें उड़ाते और प्यास बुझाते इन हाथियों के वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहे हैं, जिन्हें देखने के लिए आसपास के गांवों के लोग नदी किनारे जमा हो रहे हैं।
वन विभाग की चेतावनी: 'यह पर्यटन नहीं, खतरनाक स्थिति है'
नदी किनारे हाथियों को देखने पहुंच रहे कौतूहलवश लोगों को लेकर वन विभाग बेहद मुस्तैद और चिंतित है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी और प्यास से परेशान जंगली हाथी किसी भी समय चिड़चिड़े या आक्रामक हो सकते हैं। ऐसे में उनके नजदीक जाकर सेल्फी लेना या वीडियो बनाना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। वन विभाग ने स्थानीय लोगों और राहगीरों से अपील की है कि वे हाथियों को देखकर उनके रास्ते में न आएं और एक सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
विभाग की दलील— 'टैंकरों से भरा जा रहा है पानी, हर स्थिति पर नजर'
इस पूरे मामले पर जब वन्यजीव विभाग के इंस्पेक्टर ज्योतिराम से बात की गई, तो उन्होंने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया। उनका कहना है कि हाथियों का घूमना उनकी स्वाभाविक प्रवृत्तियों का हिस्सा भी हो सकता है। हालांकि, उन्होंने माना कि गर्मी में पानी की मांग बढ़ जाती है। ज्योतिराम ने बताया, "विभाग ने वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए जंगल के भीतर बने कृत्रिम तालाबों में टैंकरों के जरिए पानी डलवाना शुरू कर दिया है। जहाँ भी पानी की कमी की रिपोर्ट आ रही है, वहां तुरंत जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।"
लेकिन, धरातल पर हाथियों का लगातार नदी की तरफ रुख करना वन विभाग के दावों पर सवालिया निशान जरूर लगाता है। पर्यावरणविदों का मानना है कि कृत्रिम रूप से टैंकरों द्वारा पानी डालना एक अस्थायी समाधान हो सकता है, लेकिन कलेसर जैसे बड़े नेशनल पार्क के पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को बचाने के लिए प्राकृतिक जल संचयन के स्रोतों को नए सिरे से जीवित करना बेहद जरूरी है।