पानीपत-कुरुक्षेत्र के दो दोस्तों के साथ 'डोंकी रूट' पर दरिंदगी: एजेंट ने ऐंठे लाखों, लिथुआनिया की जेल काटकर लौटे वतन
May 21, 2026 9:57 AM
यमुनानगर। हरियाणा में विदेशों का क्रेज और उसके नाम पर होने वाला 'डोंकी' का काला खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला पानीपत के गांव किवाना निवासी संदीप कुमार और कुरुक्षेत्र के कल्याण नगर निवासी हितेश कुमार के साथ सामने आया है। इन दोनों दोस्तों की मुलाकात मार्च 2023 में करनाल के खुखनी (हाल निवासी गुमथला राव, यमुनानगर) के रहने वाले एजेंट दिनेश कुमार और उसके साथी विक्रम से हुई थी। दिनेश ने दोनों को झांसा दिया कि वह उन्हें ₹13 लाख 80 हजार प्रति व्यक्ति के खर्चे पर सीधे पुर्तगाल भेजेगा, जहां मोटी सैलरी वाली नौकरी और पीआर पक्की होगी। झांसे में आकर दोनों ने करीब ₹24 लाख टिकट और वीजा के नाम पर दे दिए। लेकिन जब आरोपियों ने दिल्ली से सीधे पुर्तगाल के बजाय रूस (मॉस्को) की टिकट थमाई, तो युवकों के पैर तले जमीन खिसक गई। विरोध करने पर आरोपी दिनेश ने स्थानीय पंचायत के सामने कसम खाई कि वह रूस से पोलैंड का लीगल वीजा लगवाकर उन्हें पुर्तगाल पहुंचाएगा।
पाकिस्तानी गुर्गे के हवाले किया, फिर रात के अंधेरे में दी जंगल में मरने की धमकी
भरोसे के जाल में फंसे दोनों युवक 20 अप्रैल 2023 को मॉस्को पहुंचे, लेकिन वहां उनके स्वागत के लिए कोई लीगल अधिकारी नहीं बल्कि दिनेश का एक पाकिस्तानी गुर्गा खड़ा था। उसने दोनों को एक होटल में ठहराया, जहां पहले से मौजूद अन्य लड़कों से बात करने पर पीड़ितों को समझ आ गया कि वे एक मानव तस्करी वाले अवैध गिरोह के चंगुल में फंस चुके हैं। कुछ ही दिन बाद खेल बदला और आरोपियों ने दोनों को रूस से बेलारूस शिफ्ट कर दिया। एक रात दिनेश का फोन आया कि पोलैंड का वीजा नहीं मिल रहा, इसलिए अब गाड़ी से बॉर्डर पार करना होगा। पीड़ितों के मुताबिक, एक अंजान गाड़ी उन्हें रात के घने अंधेरे में बेलारूस के एक खतरनाक जंगल में छोड़कर गायब हो गई। जब खौफ के मारे दोनों युवकों ने आगे पैदल बढ़ने से मना किया, तो एजेंट दिनेश ने फोन पर धमकी दी कि अगर वापस मुड़े तो इसी जंगल में मरने के लिए छोड़ दूंगा, कोई बचाने नहीं आएगा।
लिथुआनिया की जेल से जैसे-तैसे बचे, अब चार जिलों की खाक छानने के बाद थमी फाइल
जान बचाने की मजबूरी में दोनों दोस्त रोते-बिलखते हुए आगे बढ़े और घने जंगलों को पार करते हुए लिथुआनिया की सीमा में घुस गए। लेकिन किस्मत ने यहां भी साथ नहीं दिया और लिथुआनियाई बॉर्डर सिक्योरिटी ने उन्हें दबोच लिया। विदेशी अदालत में दोनों ने एजेंट दिनेश और विक्रम के खिलाफ गवाही दी कि कैसे उन्हें धोखे से इस नरक में धकेला गया, लेकिन अवैध घुसपैठ के कारण उन्हें वहां की जेल में सजा काटनी पड़ी। बाद में 'इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन' (IOM) संस्था की मदद से दोनों को जेल से रिहा कराकर भारत डिपोर्ट किया गया।
29 जून 2023 को वतन वापसी के बाद जब पीड़ितों ने पंचायत जोड़ी, तो आरोपियों ने दबाव में आकर ₹27.60 लाख में से सिर्फ ₹7 लाख ही वापस किए और बाकी रकम डकार गए। इंसाफ के लिए पीड़ित पहले पानीपत के समालखा थाने गए, फिर कुरुक्षेत्र और करनाल पुलिस के चक्कर काटे। महीनों तक फाइल एक जिले से दूसरे जिले घूमती रही। आखिरकार, गहन जांच के बाद अब यमुनानगर के जठलाना थाने में आरोपी दिनेश कुमार और विक्रम के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी) और इमिग्रेशन एक्ट की धारा 24 के तहत मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने तफ्तीश शुरू कर दी है।