यमुना को जहरीला बनाने वाले फैक्ट्रियों की अब खैर नहीं; हरियाणा प्रदूषण बोर्ड ने जारी किए कड़े निर्देश, उल्लंघन पर होगी सील
May 29, 2026 3:46 PM
यमुनानगर। यमुना नदी में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण और औद्योगिक कचरे को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। बोर्ड ने औद्योगिक हब माने जाने वाले यमुनानगर की फैक्ट्रियों के लिए नया फरमान जारी किया है, जिससे अब चोरी-छिपे नदियों में जहरीला पानी बहाने वाले उद्यमियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। यमुना एक्शन प्लान को जमीनी स्तर पर अमलीजामा पहनाने के लिए बोर्ड ने एक बड़ा फैसला लेते हुए प्रदूषण की निगरानी का दायरा सीधे छोटे उद्योगों तक बढ़ा दिया है। अब तक जो इकाइयां कम अपशिष्ट जल छोड़ने का हवाला देकर बच निकलती थीं, वे भी अब सीधे रडार पर आ गई हैं।
फैक्ट्रियों में लगेंगे 'तीसरी आंख' और फ्लो मीटर; नोडल अधिकारी ने बुलाई बैठक
प्रशासनिक मुस्तैदी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिला स्तर पर इस पूरे अभियान की कमान वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता सह नोडल अधिकारी नवीन गुलिया को सौंपी गई है। आदेशों को तुरंत प्रभावी बनाने के लिए गुलिया ने यमुनानगर के सभी प्रमुख उद्योग संगठनों और औद्योगिक इकाइयों के साथ एक आपात समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मेटल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अलावा बल्लारपुर पेपर मिल, सरस्वती शुगर मिल और ब्लू क्राफ्ट स्टार्च मिल जैसी दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधि और तकनीकी एक्सपर्ट शामिल हुए।
बैठक में नोडल अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अब यह बहाना नहीं चलेगा कि फैक्ट्री छोटी है। जिन उद्योगों से प्रतिदिन 10 किलोलीटर से कम भी केमिकल युक्त पानी निकलता है, उन्हें भी अपने डिस्चार्ज पॉइंट पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम, फ्लो मीटर और पीटीजेड कैमरे इंस्टॉल करने होंगे। इन कैमरों और मीटरों का सीधा लिंक पंचकूला स्थित मुख्य नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) से जोड़ा जाएगा, ताकि पानी के बहाव और उसकी गुणवत्ता पर पल-पल की नजर रखी जा सके।
"कार्रवाई के लिए रहें तैयार"— आधी-अधूरी ईटीपी प्रक्रिया पर लगेगी रोक
समीक्षा बैठक के दौरान पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने उद्योगों को तकनीकी खामियों को जल्द से जल्द दूर करने की नसीहत दी। देखने में आता है कि कई उद्योग कागजों पर तो एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) चलाते हैं, लेकिन लागत बचाने के चक्कर में रात के अंधेरे में आधा-अधूरा ट्रीट किया गया पानी ही नालों में बहा देते हैं। ये नाले आगे चलकर सीधे यमुना नदी में मिलते हैं, जिससे दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक पानी की गुणवत्ता खराब होती है।
अधिकारियों ने साफ लफ्जों में कहा कि पानी पूरी तरह से साफ होने के बाद ही परिसर से बाहर जाना चाहिए। बोर्ड के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह के हवाले से कड़ा संदेश देते हुए कहा गया कि यदि किसी भी फैक्ट्री का कैमरा बंद मिला या फ्लो मीटर के साथ छेड़छाड़ पाई गई, तो बिना किसी कारण बताओ नोटिस के भारी-भरकम जुर्माना लगाने के साथ-साथ बिजली-पानी का कनेक्शन काटने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।